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RAS प्रश्न

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में किगाली संशोधन (2016) का मुख्य उद्देश्य किन पदार्थों को चरणबद्ध तरीके से कम करना है?

सही उत्तर: (C) हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs)।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का किगाली संशोधन 2016 हाइड्रोफ्लोरोकार्बन यानी HFCs के उत्पादन और खपत को चरणबद्ध तरीके से कम करने के लिए है।

  1. (A)

    कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)

  2. (B)

    क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs)

  3. (C)

    हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs)

  4. (D)

    सल्फर हेक्साफ्लोराइड (SF₆)

व्याख्या

किगाली संशोधन का केंद्र हाइड्रोफ्लोरोकार्बन हैं, क्योंकि इसके तहत मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के पक्षकार इनके उत्पादन और खपत को चरणबद्ध तरीके से घटाते हैं। हाइड्रोफ्लोरोकार्बन को ओजोन-क्षयकारी पदार्थों के विकल्प के रूप में लाया गया था, इसलिए वे समतापमंडलीय ओजोन परत को नष्ट नहीं करते। फिर भी पर्यावरण परीक्षा में उनका महत्व इसलिए है कि उनकी वैश्विक तापवृद्धि क्षमता बहुत अधिक है और जलवायु पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इसी कारण 2016 में किगाली में इन पदार्थों को नियंत्रित सूची में जोड़कर धीरे-धीरे कमी का समय तय किया गया। भारत ने 2021 में इस संशोधन की पुष्टि की।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) कार्बन डाइऑक्साइड को किगाली संशोधन के तहत घटाए जाने वाला पदार्थ नहीं बताया गया; CO2 उत्सर्जन में कमी केवल हाइड्रोफ्लोरोकार्बन कमी का जलवायु संबंधी लाभ हो सकता है।
  • (B) किगाली संशोधन हाइड्रोफ्लोरोकार्बन के उत्पादन और खपत में कमी से जुड़ा है, इसलिए CFCs इस संशोधन का प्राथमिक लक्ष्य नहीं हैं।
  • (D) सल्फर हेक्साफ्लोराइड यानी SF6 का नाम किगाली संशोधन के नियंत्रित पदार्थ के रूप में नहीं है; यह संशोधन हाइड्रोफ्लोरोकार्बन को ही लक्ष्य बनाता है।

अवधारणा

यह प्रश्न पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी में ओजोन संरक्षण, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और जलवायु-प्रभाव वाली गैसों के अंतर को परखता है। राजस्थान प्रशासनिक सेवा में यह विषय बार-बार आता है क्योंकि संधि का नाम ओजोन से जुड़ा है, पर किगाली संशोधन का सीधा लक्ष्य हाइड्रोफ्लोरोकार्बन हैं।

स्रोत

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