RAS प्रश्न
अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) भारतीय मानसून में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ITCZ क्या है?
सही उत्तर: (D) भूमध्य रेखा के पास एक निम्न दाब क्षेत्र, जहाँ दोनों गोलार्धों की व्यापारिक पवनें आकर मिलती हैं।
अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र भूमध्य रेखा के पास स्थित निम्न दाब क्षेत्र है, जहाँ दोनों गोलार्धों की व्यापारिक पवनें मिलती हैं और हवा ऊपर उठती है।
व्याख्या
अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र में दाब और पवनों का मिलना केंद्रीय भूमिका निभाता है। एनसीईआरटी के अनुसार यह भूमध्य रेखा पर स्थित निम्न दाब क्षेत्र है, जहाँ व्यापारिक पवनें अभिसरित होती हैं और हवा ऊपर उठती है। ग्रीष्मकाल में इसकी स्थिति उत्तर की ओर खिसकती है; जुलाई में यह लगभग 20° से 25° उत्तर अक्षांशों पर, गंगा मैदान के ऊपर, मानसून द्रोणी कहलाती है। यह द्रोणी उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में तापीय निम्न दाब के विकास को बढ़ावा देती है। इसी खिसकाव के कारण दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक पवनें भूमध्य रेखा पार करके कोरिऑलिस बल से दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर बहती हैं और दक्षिण-पश्चिम मानसून बनती हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) तिब्बती पठार के ऊपर उच्च दाब क्षेत्र सही परिभाषा नहीं है, क्योंकि अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र भूमध्य रेखा के पास निम्न दाब क्षेत्र है।
- (B) अरब सागर की ठंडी महासागरीय धारा सही नहीं है, क्योंकि यहाँ महासागरीय धारा नहीं बल्कि व्यापारिक पवनों के अभिसरण वाला निम्न दाब क्षेत्र है।
- (C) बंगाल की खाड़ी पर स्थायी चक्रवाती प्रणाली सही नहीं है, क्योंकि अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र खिसकने वाला निम्न दाब क्षेत्र है और जुलाई में गंगा मैदान के ऊपर मानसून द्रोणी बनता है।
अवधारणा
भारतीय मानसून की क्रियाविधि में दाब-पवन तंत्र और अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र का मौसमी खिसकाव मुख्य भूमिका निभाते हैं। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि मानसून का आगमन, मानसून द्रोणी और पवनों की दिशा इन्हीं प्रक्रियाओं से समझी जाती है।
