RAS प्रश्न
भारत के गोंडवाना कोयला क्षेत्र मुख्य रूप से किस भूवैज्ञानिक काल के हैं?
सही उत्तर: (D) पर्मियन-कार्बोनिफेरस (लगभग 25 करोड़ वर्ष)।
भारत के गोंडवाना कोयला क्षेत्र मुख्य रूप से पर्मियन-कार्बोनिफेरस भूवैज्ञानिक काल के हैं, जिनमें पर्मियन स्तरों में कोयले की परतें मिलती हैं।
व्याख्या
गोंडवाना कोयले को भारत के कोयला भंडार का मुख्य आधार माना जाता है; लगभग 98% भंडार इसी वर्ग के हैं और इनका प्रमुख निर्माण पर्मियन काल, यानी लगभग 25 करोड़ वर्ष पहले, हुआ। आधिकारिक NDRDGH पेज भी गोंडवाना चट्टानों को पर्मो-कार्बोनिफेरस से प्रारंभिक क्रिटेशियस आयु का बताता है और स्पष्ट करता है कि निचले पर्मियन अवसादों में कोयले की परतें हैं, जबकि ऊपरी पर्मियन गोंडवाना फिर से कोयला-युक्त हैं। इसलिए विकल्प D सही बैठता है। दामोदर, महानदी और गोदावरी घाटियां इसी गोंडवाना कोयला परंपरा से जुड़ी हैं, जबकि तृतीयक कोयले असम, मेघालय और जम्मू जैसे क्षेत्रों में अलग, अपेक्षाकृत नए निक्षेप के रूप में मिलते हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) तृतीयक कोयला गोंडवाना कोयला क्षेत्रों की मुख्य आयु नहीं है; इसका संबंध असम, मेघालय और जम्मू के अपेक्षाकृत नए कोयले से है।
- (B) जुरासिक को भारतीय गोंडवाना कोयला क्षेत्रों की प्राथमिक आयु नहीं माना गया है, क्योंकि पर्मियन स्तरों में कोयले की परतें और ऊपरी पर्मियन गोंडवाना में फिर से कोयला-धारिता मिलती है।
- (C) चतुर्थक काल कोयला निर्माण के लिए बहुत नया है, जबकि प्रश्न में पूछे गए गोंडवाना कोयले का संबंध पर्मियन/पर्मो-कार्बोनिफेरस आयु से है।
अवधारणा
यह प्रश्न भारत के खनिज संसाधनों में कोयला क्षेत्रों की भूवैज्ञानिक आयु को जांचता है। RAS में यह बार-बार आता है क्योंकि कोयला-क्षेत्र, नदी-घाटियां और भूवैज्ञानिक काल को साथ जोड़कर पूछा जाता है।
