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RAS प्रश्न

ला नीना आमतौर पर भारत में किस प्रकार के मानसून की ओर ले जाती है?

सही उत्तर: (D) सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा।

ला नीना भारत में आम तौर पर सामान्य या सामान्य से अधिक मानसूनी वर्षा से जुड़ा होता है।

  1. (A)

    अपर्याप्त वर्षा

  2. (B)

    मानसून की विलंबित शुरुआत

  3. (C)

    मानसून पर कोई प्रभाव नहीं

  4. (D)

    सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा

व्याख्या

ला नीना में पूर्वी प्रशांत का जल ठंडा होता है। इससे व्यापारिक हवाएँ और वॉकर परिसंचरण मजबूत होते हैं, इसलिए भारत में मानसून सामान्यतः अच्छा या सामान्य से अधिक वर्षा वाला रहता है। MAUSAM में प्रकाशित लेख में 1871-1990 की 120-वर्षीय अवधि के लिए एल नीनो और ला नीना वर्षों को अखिल भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून वर्षा में सामान्य से फर्क के साथ देखा गया है। एल नीनो वर्षों में कमी वाली वर्षा की प्रवृत्ति दिखती है, जबकि ला नीना वर्ष भारत में अधिक वर्षा वाले वर्षों की ओर झुकते हैं। इसलिए सही दिशा वर्षा की मात्रा है, मानसून की शुरुआत की तारीख नहीं।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) अपर्याप्त वर्षा एल नीनो वर्षों से अधिक जुड़ी प्रवृत्ति है; ला नीना वर्ष भारत में अधिक वर्षा की ओर झुकते हैं।
  • (B) ला नीना का सामान्य प्रभाव वर्षा की मात्रा से जुड़ा है; विलंबित शुरुआत के बजाय सामान्य या अधिक वर्षा की प्रवृत्ति प्रमुख रहती है।
  • (C) मानसून पर कोई प्रभाव नहीं कहना गलत है, क्योंकि एल नीनो और ला नीना वर्ष भारतीय मानसून वर्षा में सामान्य से फर्क से जुड़े हैं।

अवधारणा

भारत के मानसून पर एल नीनो-ला नीना का प्रभाव RAS के लिए महत्वपूर्ण अवधारणा है। RAS में यह विषय बार-बार आता है, क्योंकि मानसून, वर्षा का सामान्य से ऊपर-नीचे होना और भारतीय भूगोल आपस में सीधे जुड़े हैं।

स्रोत

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