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RAS प्रश्न

भारत के लिए जेट स्ट्रीम महत्वपूर्ण हैं क्योंकि:

सही उत्तर: (D) उप-उष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट धारा शीतकालीन मौसम को प्रभावित करती है; इसका उत्तर की ओर खिसकना मानसून की शुरुआत करता है।

भारत के लिए जेट स्ट्रीम इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उप-उष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट शीतकालीन मौसम और पश्चिमी विक्षोभों को प्रभावित करती है, जबकि उसके उत्तर की ओर हटने के बाद पूर्वी जेट के स्थापित होने से मानसून की शुरुआत और मजबूती में मदद मिलती है।

  1. (A)

    ये भूकंप का कारण बनती हैं

  2. (B)

    इनका मौसम पर कोई प्रभाव नहीं

  3. (C)

    ये केवल विमानन को प्रभावित करती हैं

  4. (D)

    उप-उष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट धारा शीतकालीन मौसम को प्रभावित करती है; इसका उत्तर की ओर खिसकना मानसून की शुरुआत करता है

व्याख्या

जेट स्ट्रीम भारत की ऊपरी वायुमंडलीय पवन-व्यवस्था का ऐसा हिस्सा हैं जो मौसम और मानसून दोनों से जुड़ता है। सर्दियों में उप-उष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट उत्तर भारत के ऊपर रहती है और पश्चिमी विक्षोभों को दिशा देती है, इसलिए उत्तर-पश्चिमी और उत्तरी भारत के शीतकालीन मौसम पर उसका असर पड़ता है। NCERT के अनुसार मानसून की शुरुआत में अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र की स्थिति का बदलाव, उत्तर भारतीय मैदानों से पश्चिमी जेट स्ट्रीम के हटने से संबंधित है। पश्चिमी जेट के हटने के बाद 15° उत्तरी अक्षांश के आसपास पूर्वी जेट स्ट्रीम स्थापित होती है, और इसी पूर्वी जेट को भारत में मानसून की अचानक शुरुआत से जोड़ा गया है। इसलिए जेट स्ट्रीम को केवल ऊँचाई की हवा नहीं, बल्कि मानसूनी तंत्र की अहम कड़ी समझना चाहिए।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) जेट स्ट्रीम ऊपरी वायुमंडल की तेज हवाएँ हैं; उनका संबंध मौसम, पश्चिमी विक्षोभ और मानसून से है, भूकंप से नहीं।
  • (B) यह विकल्प उलटा है, क्योंकि जेट स्ट्रीम भारत के शीतकालीन मौसम और मानसून की शुरुआत से जुड़ती हैं।
  • (C) विमानन पर असर जेट स्ट्रीम का एक सीमित पहलू हो सकता है, पर भारत की जलवायु में उनका बड़ा महत्व पश्चिमी विक्षोभों और मानसूनी तंत्र पर प्रभाव के कारण है।

अवधारणा

भारत की जलवायु में ऊपरी वायुमंडलीय परिसंचरण और मानसून-तंत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है। RAS में यह अवधारणा बार-बार आती है क्योंकि पश्चिमी विक्षोभ, शीतकालीन वर्षा और दक्षिण-पश्चिम मानसून को अलग-अलग नहीं, एक जुड़े हुए मौसमी तंत्र के रूप में समझना पड़ता है।

स्रोत

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