RAS प्रश्न
अल नीनो पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का असामान्य तापन है। शक्तिशाली अल नीनो का भारतीय दक्षिण-पश्चिम मानसून पर आमतौर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
सही उत्तर: (A) यह मानसून को कमजोर करता है, जिससे सामान्य से कम वर्षा होती है।
शक्तिशाली अल नीनो आमतौर पर भारतीय दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर करता है, जिससे सामान्य से कम वर्षा की स्थिति बनती है।
व्याख्या
अल नीनो पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के असामान्य तापन से जुड़ा है। शक्तिशाली अल नीनो प्रशांत और हिंद महासागर के बीच समुद्री सतह तापमान का अंतर घटाता है, जिससे वॉकर परिसंचरण कमजोर पड़ता है और भारत की ओर नमी का प्रवाह कम होता है। पत्र सूचना कार्यालय के अनुसार अल नीनो घटना के दौरान भारतीय ग्रीष्म मानसून सामान्य से कमजोर रहता है और घटना की तीव्रता उसके प्रभाव की मात्रा तय करती है। इसलिए मजबूत अल नीनो में सामान्य से कम मानसूनी वर्षा की संभावना बनती है; 2002 और 2009 के गंभीर सूखे भी शक्तिशाली अल नीनो घटनाओं से जुड़े रहे हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) अल नीनो के दौरान भारतीय ग्रीष्म मानसून सामान्य से कमजोर रहता है और घटना की तीव्रता प्रभाव को बदलती है।
- (C) ला नीना जैसी स्थिति में मानसून मजबूत होने की संभावना अधिक रहती है; अल नीनो में मानसून मजबूत नहीं, सामान्य से कमजोर होता है।
- (D) मजबूत अल नीनो का मुख्य प्रभाव कुल वर्षा बढ़ाना नहीं, नमी के प्रवाह और मानसून को कमजोर करना है।
अवधारणा
महासागर-वायुमंडल अंतःक्रिया, वॉकर परिसंचरण और भारतीय मानसून के बाहरी नियंत्रण आरएएस भूगोल के महत्वपूर्ण विषय हैं। मानसून, सूखा और कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था राजस्थान सहित भारत की भूगोल-आर्थिक समझ से सीधे जुड़ते हैं।
