RAS प्रश्न
राष्ट्रीय जल नीति 2012 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जल आवंटन में पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। 2. सिंचाई को जलविद्युत उत्पादन से अधिक प्राथमिकता दी गई है। 3. नीति में जल को एक आर्थिक वस्तु मानकर उसकी कीमत तय करना अनिवार्य किया गया है। 4. नदियों की पारिस्थितिक जरूरतों को सबसे कम प्राथमिकता दी गई है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
सही उत्तर: (B) केवल 1, 2 और 3।
राष्ट्रीय जल नीति 2012 में जल आवंटन में पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता, नदियों की पारिस्थितिक जरूरतों को दूसरी प्राथमिकता, सिंचाई को जलविद्युत से ऊपर स्थान और जल को दुर्लभता दर्शाने वाली आर्थिक वस्तु मानने की बात दी गई है।
व्याख्या
राष्ट्रीय जल नीति 2012 में जल आवंटन का क्रम पेयजल से शुरू होता है: पेयजल पहले, फिर नदियों की पारिस्थितिक जरूरतें, उसके बाद सिंचाई, फिर जलविद्युत और अंत में अन्य उपयोग। इसलिए कथन 1 सही है, क्योंकि पेयजल सर्वोच्च प्राथमिकता है। कथन 2 भी सही है, क्योंकि सिंचाई जलविद्युत से ऊपर रखी गई है। PIB द्वारा दिए गए नीति-सार में भी कहा गया है कि सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता जैसी पूर्व-आवश्यकताओं के बाद जल को आर्थिक वस्तु माना जाए, ताकि संरक्षण और कुशल उपयोग बढ़े; इसलिए कथन 3 सही है। कथन 4 उल्टा है: नदियों की पारिस्थितिक जरूरतें सबसे नीचे नहीं, पेयजल के बाद दूसरी प्राथमिकता पर हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) A केवल कथन 1 और 2 को लेता है, जबकि नीति जल को दुर्लभता दिखाने वाली आर्थिक वस्तु मानने की बात भी करती है, इसलिए कथन 3 को छोड़ना गलत है।
- (C) C कथन 2 को छोड़ देता है, जबकि राष्ट्रीय जल नीति 2012 के दिए गए क्रम में सिंचाई जलविद्युत से ऊपर रखी गई है।
- (D) D कथन 4 को सही मानता है, जबकि नदियों की पारिस्थितिक जरूरतें सबसे कम नहीं बल्कि पेयजल के बाद दूसरी प्राथमिकता पर हैं।
अवधारणा
यह प्रश्न भारत के भूगोल में जल संसाधन प्रबंधन, जल आवंटन और नीति-आधारित प्राथमिकता क्रम को जांचता है। RAS में ऐसे प्रश्न इसलिए आते हैं क्योंकि पेयजल, सिंचाई, नदी-पारिस्थितिकी और जल शासन सीधे नीति और भूगोल दोनों से जुड़े हैं।
