RAS प्रश्न
राजस्थान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पुरानी 10+2 संरचना के स्थान पर 5+3+3+4 की नई पाठ्यचर्या संरचना की सिफारिश करती है, जिसमें 3 से 18 वर्ष आयु-वर्ग के बच्चे शामिल हैं। 2. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार कम-से-कम कक्षा 5 तक, और बेहतर हो तो कक्षा 8 तक, शिक्षा का माध्यम घरेलू भाषा, मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा होना चाहिए। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
सही उत्तर: (C) 1 और 2 दोनों।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में पुरानी 10+2 व्यवस्था के स्थान पर 3 से 18 वर्ष आयु-वर्ग के लिए 5+3+3+4 संरचना और कम-से-कम कक्षा 5 तक मातृभाषा, घरेलू भाषा, स्थानीय भाषा या क्षेत्रीय भाषा में शिक्षण की सिफारिश की गई है।
व्याख्या
दोनों कथन सही हैं, क्योंकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 स्कूल शिक्षा की बनावट और भाषा-नीति, दोनों में बदलाव बताती है। PIB के अनुसार 10+2 पाठ्यक्रम संरचना को 5+3+3+4 संरचना से बदला जाना है, जो क्रमशः 3-8, 8-11, 11-14 और 14-18 वर्ष आयु-वर्गों से जुड़ी है। इससे 3-6 वर्ष का पूर्व-प्राथमिक चरण भी स्कूल पाठ्यक्रम के दायरे में आता है और नई व्यवस्था में 12 वर्ष की स्कूली शिक्षा के साथ 3 वर्ष आंगनवाड़ी या पूर्व-प्राथमिक शिक्षा शामिल है। भाषा के बारे में नीति कम-से-कम कक्षा 5 तक, और बेहतर हो तो कक्षा 8 तथा आगे तक, मातृभाषा, स्थानीय भाषा या क्षेत्रीय भाषा को शिक्षण-माध्यम मानती है। इसलिए 1 और 2 दोनों सही हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) यह विकल्प कथन 2 को छोड़ देता है, जबकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 कम-से-कम कक्षा 5 तक मातृभाषा, स्थानीय भाषा या क्षेत्रीय भाषा में शिक्षण की स्पष्ट सिफारिश करती है।
- (B) यह विकल्प कथन 1 को छोड़ देता है, जबकि नीति 10+2 संरचना की जगह 3-18 वर्ष आयु-वर्गों से जुड़ी 5+3+3+4 पाठ्यचर्या संरचना बताती है।
- (D) यह विकल्प दोनों कथनों को अस्वीकार करता है, जबकि PIB की विज्ञप्ति में नई 5+3+3+4 संरचना और कक्षा 5 तक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा माध्यम, दोनों दिए गए हैं।
अवधारणा
यह प्रश्न राजस्थान अर्थव्यवस्था और सामाजिक क्षेत्र में शिक्षा-नीति के कार्यान्वयन से जुड़ा है। RAS में ऐसी नीतियां बार-बार पूछी जाती हैं, क्योंकि वे राज्य के स्कूल ढांचे, प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा और भाषा-माध्यम जैसे व्यावहारिक मुद्दों से सीधे जुड़ती हैं।
