RAS प्रश्न
भारत में पंचायती राज के विकास में निम्नलिखित मील के पत्थरों को कालक्रम से व्यवस्थित करें: 1. पंचायती राज पर अशोक मेहता समिति की रिपोर्ट 2. 73वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम लागू 3. बलवंत राय मेहता समिति ने त्रिस्तरीय PRI की सिफारिश की 4. GVK राव समिति ने PRI के पुनरुज्जीवन की सिफारिश की 5. L.M. सिंघवी समिति की ग्राम सभा सुदृढ़ीकरण पर रिपोर्ट
सही उत्तर: (A) पहले 3, फिर 1, फिर 4, फिर 5 और अंत में 2।
भारत में पंचायती राज के विकास का कालक्रम बलवंत राय मेहता समिति 1957, अशोक मेहता समिति 1977-78, GVK राव समिति 1985, L.M. सिंघवी समिति 1986 और 73वां संवैधानिक संशोधन 24 अप्रैल 1993 है।
व्याख्या
पंचायती राज के विकास में वर्षों के आधार पर पहला स्थान बलवंत राय मेहता समिति 1957 का है, जिसने गाँव, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर पंचायती राज संस्थाओं की सिफारिश की। इसके बाद अशोक मेहता समिति 1977-78 है, फिर GVK राव समिति 1985 और उसके बाद L.M. सिंघवी समिति 1986 आती है। अंतिम पड़ाव 73वां संवैधानिक संशोधन है, जो 24 अप्रैल 1993 को लागू हुआ। इसलिए क्रम 3-1-4-5-2 बनता है। इस क्रम में गलती अक्सर इसलिए होती है क्योंकि 1977-78 से 1986 के बीच तीन समितियाँ आती हैं, लेकिन उनके वर्ष अलग-अलग हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) B में GVK राव समिति 1985 को अशोक मेहता समिति 1977-78 से पहले रख दिया गया है, जबकि अशोक मेहता समिति पहले आती है।
- (C) C में अशोक मेहता समिति 1977-78 को बलवंत राय मेहता समिति 1957 से पहले रखा गया है, जबकि बलवंत राय मेहता समिति कालक्रम में सबसे पहले है।
- (D) D में L.M. सिंघवी समिति 1986 को GVK राव समिति 1985 से पहले रखा गया है, जबकि GVK राव समिति 1985 में आती है।
अवधारणा
पंचायती राज के संस्थागत विकास और 73वें संवैधानिक संशोधन से जुड़े कालक्रम का RAS में महत्व है। यह हिस्सा इसलिए बार-बार आता है क्योंकि स्थानीय स्वशासन की समझ समितियों, ग्राम सभा और संवैधानिक दर्जे के क्रम पर टिकी होती है।
