RAS प्रश्न
भारत में अल्पाइन वनस्पति किस ऊँचाई से ऊपर पाई जाती है:
सही उत्तर: (B) 3600 मीटर।
भारत में हिमालयी अल्पाइन वनस्पति आमतौर पर समुद्र तल से लगभग 3600 मीटर की ऊँचाई से ऊपर मिलती है।
व्याख्या
अल्पाइन वनस्पति हिमालय की सबसे ऊँची वनस्पति-पट्टी है। लगभग 3600 मीटर से ऊपर शीतोष्ण वन और घासभूमि की जगह अल्पाइन वनस्पति मिलने लगती है। इस पट्टी की निचली सीमा के आसपास सिल्वर फर, जुनिपर, पाइन और बर्च जैसे पेड़ मिलते हैं। हिम-रेखा की ओर बढ़ने पर इनका आकार छोटा होता जाता है और आगे झाड़ियाँ, काई, लाइकेन तथा अल्पाइन घास के मैदान मिलते हैं। इन घास के मैदानों को स्थानीय भाषा में बुग्याल कहा जाता है। भारत सरकार का पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय 3500-5000 मीटर के क्षेत्र में उप-अल्पाइन और अल्पाइन वनस्पति का वर्णन करता है; यहाँ आमतौर पर पेड़ नहीं होते और निचले भागों में झाड़ीदार पौधे मिलते हैं। 4000 मीटर से ऊपर का अल्पाइन क्षेत्र साल के अधिकतर समय बर्फ़ से ढका रहता है और वहाँ वनस्पति कम होती है; 5000 मीटर से ऊपर स्थायी हिम रहता है। इसलिए विकल्पों में 3600 मीटर सबसे उपयुक्त उत्तर है, क्योंकि यहीं से अल्पाइन हिमालयी पट्टी शुरू होती है, न कि इससे नीचे मिलने वाली उष्णकटिबंधीय, उपोष्ण कटिबंधीय या शीतोष्ण वन-पट्टियाँ।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) 500 मीटर बहुत कम ऊँचाई है; इस स्तर पर अल्पाइन पट्टी नहीं, बल्कि उष्णकटिबंधीय क्षेत्र की वनस्पति आती है।
- (C) 2000 मीटर पर हिमालयी ऊँचाई का प्रभाव दिखता है, पर यह शीतोष्ण वनों की पट्टी से जुड़ा है, अल्पाइन वनस्पति की 3600 मीटर से ऊपर वाली सीमा से नहीं।
- (D) 1000 मीटर की ऊँचाई उपोष्ण कटिबंधीय वनस्पति से संबंधित है, इसलिए इसे अल्पाइन वनस्पति की आरंभिक ऊँचाई नहीं माना जाता।
अवधारणा
यह प्रश्न भारतीय भूगोल में ऊँचाई के आधार पर वनस्पति के विभाजन की समझ जाँचता है। RAS में इससे जुड़े सवाल बार-बार पूछे जाते हैं, क्योंकि हिमालयी स्थलाकृति में ऊँचाई का जलवायु, वन-प्रकार और पारिस्थितिक वितरण से सीधा संबंध है।
