तैयारी गाइड
UPPSC प्रारंभिक में कितने प्रश्न करने चाहिए?
UPPSC प्रारंभिक में सभी के लिए प्रश्नों की कोई एक सुरक्षित संख्या नहीं है; आपकी सही सीमा मॉक सटीकता और पेपर के स्तर पर निर्भर करती है। जुलाई 2026 तक, प्रारंभिक परीक्षा की मेरिट GS-I से तय होती है और GS-II में 33% मार्क्स लाना ज़रूरी है, इसलिए दोनों पेपर का हिसाब और रणनीति अलग रखें।
UPPSC प्रारंभिक की मौजूदा स्कीम क्या कहती है?
जुलाई 2026 तक, UPPSC PCS 2026 की परीक्षा योजना में 2 अनिवार्य बहुविकल्पीय पेपर हैं, जिनमें से हर पेपर 200 मार्क्स और 2 घंटे का है। GS-I में 150 प्रश्न हैं, जबकि GS-II में 100 प्रश्न हैं। GS-II में 33% मार्क्स लाना ज़रूरी है, दोनों पेपर में बैठना अनिवार्य है और प्रारंभिक परीक्षा की मेरिट GS-I के मार्क्स से तय होती है। यही फर्क प्रश्न करने की रणनीति का आधार है: GS-I में अच्छा प्रतिस्पर्धी स्कोर बनाने पर ध्यान दें, लेकिन GS-II में ज़रूरी स्तर से ठीक-ठाक बढ़त लेकर पास होने की योजना बनाएं।
| पेपर | प्रश्न | मार्क्स | भूमिका |
|---|---|---|---|
| GS-I | 150 | 200 | प्रारंभिक परीक्षा की मेरिट तय करता है |
| GS-II | 100 | 200 | 33% पर पास करना ज़रूरी |
पूरी परीक्षा की जानकारी [UPPSC परीक्षा पेज](/uppsc) पर देखें, लेकिन दोनों पेपर के स्कोर का हिसाब अलग रखें।
GS-I का स्कोर कैसे निकलता है?
आधिकारिक GS-I पेपर में 200 मार्क्स को 150 बराबर मार्क्स वाले प्रश्नों में बाँटा गया है, इसलिए एक सही जवाब के 200/150 यानी लगभग 1.333 मार्क्स मिलते हैं। निर्देशों के मुताबिक गलत जवाब पर उस प्रश्न के मार्क्स का एक-तिहाई कटता है, यानी लगभग 0.444 मार्क्स। खाली छोड़े गए प्रश्न पर कोई कटौती नहीं होती, जबकि एक से ज़्यादा विकल्प भरने पर जवाब गलत माना जाता है। इसलिए: GS-I स्कोर = सही × 1.333 − गलत × 0.444। सही हिसाब के लिए पूरे भिन्न रखें: स्कोर = सही × 4/3 − गलत × 4/9। अगर 90 जवाब सही और 30 गलत हैं, तो स्कोर 120 − 13.33 = 106.67 मार्क्स होगा; बाकी 30 खाली प्रश्नों पर कोई मार्क्स नहीं जुड़ेंगे या कटेंगे। हर [MCQ अभ्यास](/mcq) के बाद केवल किए गए प्रश्न न गिनें, यह हिसाब भी लगाएं।
एक जैसी प्रश्न संख्या पर सटीकता से स्कोर कैसे बदलता है?
आम तौर पर बताई जाने वाली प्रश्न संख्या से सटीकता ज़्यादा मायने रखती है। इस टेबल में GS-I की आधिकारिक मार्किंग के अनुसार 120 प्रश्न करने पर स्कोर निकाला गया है और सिर्फ़ कुल स्कोर को 2 दशमलव स्थान तक रखा गया है। ये केवल हिसाब समझाने वाले उदाहरण हैं, अनुमानित कटऑफ या आधिकारिक सुरक्षित सीमा नहीं।
| सटीकता | सही | गलत | निकला स्कोर |
|---|---|---|---|
| 65% | 78 | 42 | 85.33 |
| 70% | 84 | 36 | 96.00 |
| 75% | 90 | 30 | 106.67 |
| 80% | 96 | 24 | 117.33 |
एक जैसे 120 प्रश्नों पर सटीकता 65% से 80% होने पर 32 मार्क्स बढ़ते हैं। इसलिए बहुत संदेह वाले प्रश्न जोड़ने से स्कोर घट सकता है, भले ही किए गए प्रश्नों की संख्या अच्छी दिखे। टेबल को बाएँ से दाएँ पढ़ें: कई पूरे मॉक में मिली अपनी सटीकता के सबसे पास वाली पंक्ति चुनें, फिर किसी और की संख्या अपनाने के बजाय उसके आसपास की प्रश्न संख्याएँ आजमाएँ।
सभी के लिए एक सुरक्षित प्रश्न संख्या क्यों नहीं है?
सुरक्षित प्रश्न संख्या का एक दावा उन बातों को छिपा देता है जो असल नतीजा तय करती हैं: पेपर का स्तर, संदेह वाले प्रश्नों पर आपकी सटीकता और आखिर में जारी होने वाली वर्गवार कटऑफ। किसी आसान या कठिन पुराने पेपर में काम आई संख्या अगले परीक्षा चक्र में वही नतीजा पक्का नहीं कर सकती। हर जारी कटऑफ को उस परीक्षा चक्र की पुरानी कटऑफ मानें, मौजूदा सुरक्षित प्रश्न संख्या नहीं। मार्क्स और किए गए प्रश्न भी अलग रखें: बराबर प्रश्न करने वाले 2 अभ्यर्थियों के स्कोर में बड़ा फर्क हो सकता है, क्योंकि गलत जवाब पर मार्क्स कटते हैं। [PYQ पेज](/pyq) के आधिकारिक पुराने पेपर से परीक्षा जैसा अभ्यास करें, आधिकारिक नियम से स्कोर निकालें और भरोसे के स्तर के हिसाब से सटीकता लिखें। सही सवाल यह है: “किस प्रश्न-सीमा में गलतियां अचानक बढ़े बिना मेरा मॉक स्कोर मजबूत रहता है?”
मॉक सटीकता से अपनी प्रश्न-सीमा कैसे तय करें?
हाल के कई पूरे मॉक समय बाँधकर दें। हर मॉक में किए गए प्रश्नों को पक्के जवाब, विकल्प हटाकर लगाए गए जवाब और केवल अनुमान वाले जवाब के रूप में बाँटें; फिर हर हिस्से की सटीकता और कटौती के बाद बचे मार्क्स निकालें। आपकी निचली सीमा वह प्रश्न संख्या है जहाँ पक्के और भरोसेमंद तरीके से विकल्प हटाकर किए गए प्रश्न खत्म होते हैं। ऊपरी सीमा वह सबसे बड़ी संख्या है जहाँ कई मॉक में कटौती के बाद स्कोर स्थिर रहता है; जब अतिरिक्त प्रश्न बार-बार मिलने वाले मार्क्स से ज़्यादा कटौती कराने लगें, सीमा बढ़ाना रोक दें। अलग स्तर के पेपर पर इसे दोबारा जाँचें, क्योंकि एक ही संख्या पर अड़े रहने से इस तरीके का फ़ायदा खत्म हो जाता है। परीक्षा में पहले पक्के जवाब करें, फिर उन प्रश्नों पर लौटें जहाँ विकल्प हट सकते हैं और बिना आधार वाले अनुमान आखिर में रखें। इससे सुरक्षित प्रश्न संख्या किसी और का दावा नहीं, आपकी गलतियों पर टिकी अपनी प्रश्न-सीमा बनती है।
GS-II की रणनीति अलग कैसे रखें?
जुलाई 2026 तक, GS-II में 33% मार्क्स लाना ज़रूरी है, लेकिन इस पेपर में बैठना भी अनिवार्य है और GS-I का अच्छा स्कोर GS-II में असफल होने की भरपाई नहीं करता। इस पेपर में 100 प्रश्न और 200 मार्क्स हैं, इसलिए हर सही जवाब के 2 मार्क्स मिलते हैं; आधिकारिक एक-तिहाई कटौती के अनुसार हर गलत जवाब पर 2/3 मार्क्स कटते हैं। पास होने के लिए 66 मार्क्स चाहिए, लेकिन ठीक 66 की योजना में गोला भरने की गलती या सामान्य से कमजोर हिस्से की गुंजाइश नहीं रहती। समय बांधकर GS-II मॉक दें और समझ, तर्क, गणित, अंग्रेजी तथा हिंदी का हिसाब अलग रखें। उदाहरण के लिए, 40 सही और 10 गलत जवाब से 80 − 6.67 = 73.33 मार्क्स बनते हैं। यह केवल हिसाब है, सुझाई गई प्रश्न संख्या नहीं। लगातार मॉक में ज़रूरी स्तर से कुछ बढ़त मिलने तक GS-II की तैयारी जारी रखें।
आधिकारिक स्रोत
इस गाइड के लिए उपयोग किए गए स्रोत दस्तावेज़ देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
UPPSC प्रारंभिक GS-I में कितने प्रश्न करना सुरक्षित है?
सभी के लिए कोई एक सुरक्षित संख्या नहीं है। कई मॉक में लगातार मिली सटीकता, आधिकारिक नेगेटिव मार्किंग के हिसाब और पेपर के स्तर से प्रश्नों की निचली और ऊपरी सीमा तय करें।
GS-I में 90 सही और 30 गलत जवाब पर कितना स्कोर बनेगा?
आधिकारिक 200 मार्क्स, 150 प्रश्न और एक-तिहाई कटौती के हिसाब से 90 सही जवाब के 120 मार्क्स मिलेंगे और 30 गलत जवाब पर 13.33 मार्क्स कटेंगे। कुल स्कोर 106.67 मार्क्स होगा।
UPPSC प्रारंभिक में प्रश्न खाली छोड़ने पर मार्क्स कटते हैं?
नहीं। आधिकारिक पेपर के निर्देश कहते हैं कि खाली छोड़े गए प्रश्न पर कोई कटौती नहीं होती। गलत जवाब या एक से ज़्यादा भरे विकल्प पर तय एक-तिहाई कटौती होती है।
क्या UPPSC प्रारंभिक की मेरिट में GS-II जुड़ता है?
जुलाई 2026 तक, GS-II में 33% मार्क्स लाना ज़रूरी है, जबकि प्रारंभिक परीक्षा की मेरिट GS-I के मार्क्स से तय होती है। दोनों पेपर में बैठना अनिवार्य है।
क्या पुरानी कटऑफ से अपनी प्रश्न-सीमा तय करनी चाहिए?
नहीं। उसे उसी परीक्षा चक्र की पुरानी कटऑफ मानें और केवल स्कोर के संदर्भ के रूप में इस्तेमाल करें। अपनी प्रश्न-सीमा आधिकारिक मार्किंग नियम के तहत समय बाँधकर दिए गए मॉक में कटौती के बाद बचे स्कोर से तय करें।
