केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे 10 सितंबर 2026 को देवनहल्ली, बेंगलुरु, कर्नाटक में प्रौद्योगिकी केंद्र का उद्घाटन करेंगी। कर्नाटक के मंत्री श्री कृष्ण बायरे गौड़ा (बृहत्तर बेंगलुरु विकास एवं संसदीय कार्य) और श्री विजयानंद काशप्पनवर (लघु उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम), एमएसएमई मंत्रालय व राज्य के अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि तथा स्थानीय हितधारक उपस्थित रहेंगे। प्रदर्शनी में एयरोस्पेस तथा इलेक्ट्रॉनिक्स प्रणाली डिज़ाइन एवं विनिर्माण (ईएसडीएम) में भारतीय एमएसएमई का योगदान दिखाया जाएगा।
एमएसएमई मंत्रालय एमएसएमई के लिए अनुकूल माहौल बनाने तथा प्रौद्योगिकीय क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए देशभर में प्रौद्योगिकी केंद्रों (टीसी) का नेटवर्क चलाता है। ये केंद्र प्रौद्योगिकी विकास, उद्योग-स्तरीय प्रशिक्षण, डिज़ाइन, प्रोटोटाइप निर्माण, परीक्षण और उत्पादन सहायता देते हैं और प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता, सतत औद्योगिक विकास तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण इकोसिस्टम को आगे बढ़ाते हैं।
बेंगलुरु केंद्र को केंद्रीय एमएसएमई मंत्रालय ने कर्नाटक सरकार की 10 एकड़ भूमि पर 156 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित किया है। इसमें प्रशिक्षण, उत्पादन और प्रशासनिक ब्लॉक, लड़कों-लड़कियों के लिए आवासीय सुविधाएँ, कर्मचारी आवास, कार्यकारी छात्रावास और अन्य सहायक सुविधाएँ हैं। ईएसडीएम पर केंद्रित यह केंद्र अत्याधुनिक मशीनों व प्रयोगशालाओं से एमएसएमई को सरफेस-माउंट टेक्नोलॉजी (एमएमटी) लाइन, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, सीएनसी 5-एक्सिस और 3-एक्सिस मशीनें, इलेक्ट्रिक डिस्चार्ज मशीन (ईडीएम), परीक्षण प्रयोगशालाएँ, डिज़ाइन सहायता तथा व्यावसायिक व तकनीकी सलाहकार सेवाएँ देगा।
सेवाक्षेत्र में मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक इंडिया, टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स, हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज (एनएएल), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ), एयरबस, बोइंग, फिलिप्स, विप्रो, जीई, सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स तथा एयरोस्पेस, रक्षा, सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, औद्योगिक स्वचालन और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के अनेक एमएसएमई शामिल हैं। केंद्र एम्बेडेड सिस्टम डिज़ाइन, पीसीबी डिज़ाइन एवं असेंबली, स्वचालन एवं रोबोटिक्स तथा रखरखाव-मरम्मत में प्रशिक्षण देगा; प्रति वर्ष 10,000 प्रशिक्षुओं की क्षमता से कर्नाटक में रोज़गार और सतत आजीविका बढ़ाने में योगदान की उम्मीद है।
