प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई 2026 को विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम 2026 के प्रतिभागियों से संवाद किया। इन युवा प्रतिभागियों ने देश के लगभग 250 ज़िलों का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने इस पहल को मेरा युवा भारत–माय भारत मंच के विस्तार से जोड़ा और विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद से लेकर गांवों से जुड़े इस कार्यक्रम तक युवाओं के काम की सराहना की।
यह ज़मीनी पहल विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद के दौरान शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य युवाओं को केवल आभासी बातचीत तक सीमित न रखकर देश की वास्तविकताओं को सामने से समझने का अवसर देना था। तीन लाख प्रतिभागियों में से 400 से अधिक युवाओं को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और लद्दाख के सीमावर्ती गांवों में भेजने के लिए चुना गया। वहां उन्होंने स्थानीय संस्कृति, सीमावर्ती समुदायों की देशभक्ति और सशस्त्र बलों के साहस को करीब से जाना।
प्रधानमंत्री ने विकसित गांवों को विकसित भारत की नींव बताया। उन्होंने सीमावर्ती बस्तियों को देश के “आखिरी गांव” के बजाय “पहले गांव” मानने की नीतिगत सोच पर ज़ोर दिया। पहले प्रशासनिक अनदेखी के कारण ऐसे क्षेत्रों में सड़क, बिजली और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं। अब बिजली, सड़क, नल से पानी, गैस कनेक्शन और तेज़ इंटरनेट का विस्तार वहां की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और रोज़मर्रा के जीवन को बदल रहा है।
उन्होंने कार्यक्रम को बढ़ते सीमा पर्यटन, पहले सुनसान रहे गांवों में लौटती चहल-पहल, बेटियों की शिक्षा और स्थानीय कमाई से भी जोड़ा। हर प्रतिभागी से अपने अनुभव कम से कम 100 साथियों के साथ साझा करने, लोगों को वहां जाने के लिए प्रेरित करने, प्रमाणित जानकारी प्रसारित करने तथा पारिवारिक और शैक्षिक यात्राओं को बढ़ावा देने को कहा गया। मुख्य संदेश यह था कि देश की चुनौतियों और उनके समाधान में युवाओं की सीधी भागीदारी राष्ट्र-निर्माण को मज़बूत करती है।
