उच्चतम न्यायालय ने 21 अगस्त 2026 को लंबित विवादों में मध्यस्थता और समझौते के जरिए मुकदमों का बोझ घटाने के लिए तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत शुरू की। इसे ‘मध्यस्थता से निर्णय और देशभर में विवादों के सामंजस्य के लिए उच्चतम न्यायालय की पहल’, अर्थात समाधान समारोह नाम दिया गया और इसकी कार्यवाही शनिवार व रविवार को भी जारी रहनी थी। विवादों के निपटारे की प्रक्रिया में पहली बार वकील न्यायाधीशों के साथ बैठे। न्यायाधीश सामान्य न्यायिक वेश में नहीं थे और अपने नियमित ऊंचे आसन के नीचे प्रायः दो-दो के समूह में बैठे; भारत के मुख्य न्यायाधीश के साथ दो अन्य न्यायाधीश थे। पक्षकार प्रत्यक्ष या दूरस्थ रूप से, अपने वकीलों अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से शामिल हुए। समझौता स्वीकार करने से पहले न्यायाधीशों ने यह परखा कि पक्षकारों ने उसे सोच-समझकर और बिना किसी दबाव के स्वीकार किया है। न्यायालय का नियमित काम समाप्त होने के बाद लगभग 15 पीठों ने दोपहर 2 बजे कार्यवाही शुरू की। इनमें बैंक संबंधी मामले, वैवाहिक विवाद, मोटर दुर्घटना दावे, उपभोक्ता मुआवजा, श्रम कानून, भू-संपदा विनियमन, चेक अनादरण, औद्योगिक विवाद, संपत्ति व भूमि, बेदखली, सेवा कानून और कराधान से जुड़े मामले थे। अधिकांश मामले निस्तारित कर दिए गए या वापस ले लिए गए। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने कर विवादों पर भी विचार किया और बिना आमने-सामने आकलन वाले ऐसे समान मामलों की पहचान करने को कहा जो न्यायिक सूची पर बोझ डाल रहे थे, ताकि उन्हें शनिवार को सूचीबद्ध किया जा सके। इसकी तैयारी लगभग चार महीने पहले सार्वजनिक सूचना के साथ शुरू हुई थी। तीन दिनों में हुए समझौते न्यायिक आदेश के समान माने जाने थे।
उच्चतम न्यायालय में तीन दिवसीय समाधान विशेष लोक अदालत शुरू
उच्चतम न्यायालय ने स्वैच्छिक मध्यस्थता से पुराने विवाद निपटाने के लिए तीन दिवसीय समाधान विशेष लोक अदालत शुरू की। पहले दिन लगभग 15 पीठें शामिल हुईं और इस दौरान हुए समझौते न्यायिक आदेश के समान माने जाने थे।
मुख्य तथ्य
- उच्चतम न्यायालय ने 21 अगस्त 2026 को तीन दिवसीय समाधान विशेष लोक अदालत शुरू की।
- विवादों के निपटारे में पहली बार वकील न्यायाधीशों के साथ बैठे।
- न्यायालय का नियमित काम समाप्त होने के बाद लगभग 15 पीठों ने दोपहर 2 बजे कार्यवाही शुरू की।
- पक्षकार प्रत्यक्ष या दूरस्थ रूप से, वकीलों अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से शामिल हो सकते थे।
- न्यायाधीशों ने सुनिश्चित किया कि समझौते सोच-समझकर और बिना दबाव के स्वीकार किए गए हैं।
- तीन दिनों में हुए समझौते न्यायिक आदेश के समान माने जाने थे।
अभ्यास प्रश्न MCQ
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उच्चतम न्यायालय की समाधान विशेष लोक अदालत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह पुराने लंबित विवादों के निपटारे और मुकदमों का बोझ घटाने के लिए तीन दिवसीय पहल थी। 2. विवादों के निपटारे में पहली बार वकील न्यायाधीशों के साथ बैठे। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
दोनों कथन सही हैं। उच्चतम न्यायालय ने पुराने लंबित विवादों के निपटारे और मुकदमों का बोझ घटाने के लिए तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत शुरू की। समाचार में यह भी कहा गया है कि विवादों के निपटारे में पहली बार वकील न्यायाधीशों के साथ बैठे।
स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
समाधान विशेष लोक अदालत का उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य पुराने लंबित विवादों में मध्यस्थता कर समझौता कराना और उच्चतम न्यायालय में मुकदमों का बोझ घटाना था।
पक्षकार कार्यवाही में कैसे शामिल हो सकते थे?
वे प्रत्यक्ष या दूरस्थ रूप से, अपने वकीलों अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से शामिल हो सकते थे।
समझौता स्वीकार करने से पहले क्या सावधानी बरती गई?
न्यायाधीशों ने जांचा कि पक्षकारों ने समझौता सोच-समझकर और बिना किसी दबाव के स्वीकार किया है।
इन समझौतों की विधिक स्थिति क्या होनी थी?
तीन दिवसीय कार्यवाही में हुए समझौते न्यायिक आदेश के समान माने जाने थे।
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