केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गोवा की राजधानी पणजी में नारकोटिक्स नियंत्रण पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भी उपस्थित थे। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार 2029 तक ‘नशामुक्त भारत’ का संकल्प साकार करना चाहती है। जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक का तीन वर्षीय रोडमैप तैयार है, जिसमें लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्णय लिया गया है।

रोडमैप चार स्तंभों पर टिका है—खुफिया एवं अभियान आधारित प्रवर्तन; प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण; मांग एवं हानि न्यूनीकरण; तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय। डेथ ट्रायंगल और डेथ क्रिसेंट मार्गों से तस्करी पर लगाम लगाने के लिए चतुष्कोणीय रणनीति अपनाई जा रही है। 2019 से नशे के खिलाफ लड़ाई को राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता बनाया गया है। वित्तीय जाँच और पीआईटी-एनडीपीएस पर विशेष ज़ोर है तथा बॉटम-टू-टॉप और टॉप-टू-बॉटम दोनों अप्रोच से जाँच की नई अवधारणा अपनाई गई है।

शाह ने ज़ब्ती के आँकड़े बताए: 2004–14 में करीब 26 लाख किलोग्राम ड्रग्स ज़ब्त हुए जिनका मूल्य करीब ₹40 हजार करोड़ था, जबकि 2014–2026 में ₹1 लाख 89 हजार करोड़ मूल्य के 1 करोड़ 19 लाख किलोग्राम से अधिक ड्रग्स ज़ब्त हुए। नष्ट किए गए ड्रग्स 2004–14 में 3 लाख 36 हजार किलोग्राम से बढ़कर 2014–26 में 48 लाख 68 हजार किलोग्राम हो गए। नशामुक्त भारत अभियान के अंतर्गत 25 करोड़ नागरिकों से संपर्क कर शपथ दिलाई गई और उपचार-पुनर्वास से 5 लाख 70 हजार नागरिकों को नशामुक्त किया गया। सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य विभाग और जेल प्रशासन मिलकर नशामुक्ति केंद्रों की संख्या तीन गुना बढ़ाकर 1,751 करने जा रहे हैं; करीब 10,000 स्वयंसेवक सेवा देंगे। एनसीसी, एनएसएस और माय भारत से लाखों ‘नशामुक्ति मित्र’ तैयार किए जाएंगे। मार्च 2027 तक प्रत्येक राज्य में पूर्ण सुसज्जित एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फ़ोर्स के लिए 7 प्रतिशत केंद्रीय सहायता दी जाएगी; फॉरेंसिक रिपोर्ट 30 दिन में आने की व्यवस्था गृह मंत्रालय करेगा। चार स्तंभों में 25 घटक और 200 से अधिक एक्शन पॉइंट समयबद्ध तय हैं; 2026 से 2029 मिशन मोड है और तिमाही समीक्षा होगी।