राजस्थान दुर्लभ मृदा तत्वों के अन्वेषण लाइसेंस पर अमल करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह लाइसेंस बालोतरा और जोधपुर जिलों के 207.63 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लिए जारी किया गया है। संबंधित ब्लॉक नावतला-देवगढ़ (पचपदरा) और शेरगढ़ क्षेत्र में है। यहाँ लैंथेनम, सेरियम, प्रसीओडिमियम और नियोडिमियम के खनिजीकरण के संकेत मिले हैं।

इन दुर्लभ मृदा तत्वों को इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, अंतरिक्ष, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से महत्वपूर्ण खनिजों की वैज्ञानिक खोज तेज़ होगी, निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और भारत की खनिज सुरक्षा तथा आत्मनिर्भरता मज़बूत होगी।

इस घटनाक्रम की शुरुआत केंद्र सरकार द्वारा 2024 में महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया शुरू करने से हुई। इसके बाद 2025 में अन्वेषण लाइसेंस की पहले चरण की नीलामी हुई, जिसमें राजस्थान का यह ब्लॉक सफलतापूर्वक नीलाम हुआ। लाइसेंस सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड को दिया गया है। राजस्थान के खान एवं भूविज्ञान विभाग ने कंपनी के साथ समझौता भी किया है।

यह लाइसेंस मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जारी किया गया, जिनके पास खान विभाग का प्रभार भी है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (खान) अपर्णा अरोड़ा ने इसे नीलाम अन्वेषण लाइसेंस ब्लॉक को धरातल पर लागू करने की देश में पहली उपलब्धि बताया। अधिकारियों ने इस कदम को पारदर्शी और निवेश-अनुकूल खनन व्यवस्था बनाने तथा देश की महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा मज़बूत करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता से जोड़ा है।