लोकसभा ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने वाला विधेयक पारित किया
Aसीधा उत्तर
लोकसभा ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने वाला विधेयक पारित किया। इससे पहले अध्यादेश के ज़रिए यह संख्या 34 से बढ़ाकर 38 की गई थी, जबकि न्यायालय में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं।
मुख्य तथ्य
लोकसभा ने सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया।
अध्यादेश से भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित स्वीकृत संख्या 34 से बढ़कर 38 हो गई थी।
बढ़ी हुई स्वीकृत संख्या के आधार पर अध्यादेश के बाद पांच न्यायाधीश नियुक्त किए गए।
1 जनवरी 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में 92,101 मामले लंबित थे।
2025 में न्यायालय में 75,410 नए मामले आए और 65,615 मामलों का निपटारा हुआ।
संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा ने सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया। कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक को विचार के लिए रखा और मतदान के कुछ ही समय बाद इसे पारित कर दिया गया। इसका मकसद सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाकर लंबित मामलों से निपटने में मदद करना है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मई में इस विधेयक को मंज़ूरी दी थी, लेकिन इसके बाद सरकार अध्यादेश लाई। अध्यादेश से भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़कर 38 हो गई। बढ़ी हुई संख्या के आधार पर पांच न्यायाधीश नियुक्त किए गए।
विधेयक में इस बढ़ोतरी की वजह मुकदमों की लगातार बढ़ती संख्या और दायर मामलों तथा उनके अंतिम निपटारे के बीच बने अंतर को बताया गया है। 1 जनवरी 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में 92,101 मामले लंबित थे। न्यायालय 2019 से 34 न्यायाधीशों की लगभग पूरी स्वीकृत क्षमता के साथ काम कर रहा था, फिर भी 2025 में 75,410 नए मामले आए और 65,615 मामलों का निपटारा हुआ। उस दिन की कार्यवाही व्यापक संसदीय गतिरोध से भी प्रभावित रही। राज्यसभा में विपक्ष ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में जवाब देने की मांग की और राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा उठाया।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या और मामलों के बोझ के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अध्यादेश से स्वीकृत संख्या 38 से घटकर 34 हो गई।
2. 1 जनवरी 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में 65,615 मामले लंबित थे।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या · सही उत्तर D
दोनों कथन गलत हैं। अध्यादेश से स्वीकृत संख्या 34 से बढ़कर 38 हुई, घटी नहीं। 1 जनवरी 2026 को 92,101 मामले लंबित थे; 65,615 वर्ष 2025 में निपटाए गए मामलों की संख्या थी।