अहमदाबाद में आयोजित आईआईएमए हेल्थकेयर समिट 2026 के तीसरे संस्करण में केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भारत को ‘विश्व की फार्मेसी’ से आगे बढ़कर अनुसंधान, नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों के बल पर ‘विश्व की प्रयोगशाला’ बनना चाहिए। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता औषधि खोज को तेज कर सकती है, व्यक्ति के अनुरूप उपचार संभव बना सकती है तथा जांच, नैदानिक निर्णय और रोग निगरानी को बेहतर कर सकती है। इस रूपरेखा के केंद्र में सुरक्षा, जिम्मेदारी और मानव हित हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मानवीय नैदानिक निर्णय का पूरक बनना चाहिए, उसका स्थान नहीं लेना चाहिए; साथ ही रोगियों की गोपनीयता के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं। मंत्री ने सरकार, शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य संस्थाओं, नवोद्यमों और उद्योग के सहयोग से प्रायोगिक परियोजनाओं को जनसंख्या स्तर पर लागू करने का आह्वान किया। स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उत्कृष्टता केंद्र एम्स नई दिल्ली, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ और एम्स ऋषिकेश में स्थापित किए गए हैं। ₹5,000 करोड़ की पीआरआईपी योजना औषधि और चिकित्सा-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अनुसंधान तथा उद्योग-शिक्षण सहयोग मजबूत करने पर केंद्रित है। ₹10,000 करोड़ के बायोफार्मा शक्ति मिशन का उद्देश्य जैविक औषधियों और जैव-समान औषधियों की क्षमता, कुशल मानव संसाधन, नियामक व्यवस्था, नैदानिक परीक्षण क्षमता और घरेलू जैव-औषधीय परिवेश को मजबूत करना है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत 96 करोड़ से अधिक आभा पहचान-पत्र और 1,000 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य अभिलेख डिजिटल रूप से जुड़े हैं। क्षयरोग और मधुमेहजनित दृष्टिपटल रोग की शीघ्र पहचान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुप्रयोग काम आ रहे हैं। ई-संजीवनी की कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नैदानिक सहायता से 20 करोड़ से अधिक रोगियों को लाभ मिला है। इंडियाएआई मिशन और एआईकोश आंकड़ों, प्रतिरूपों तथा औजार-संग्रहों की पहुंच बढ़ाने के माध्यम हैं।
सरकार ने स्वास्थ्य सेवा और औषधि अनुसंधान के लिए जिम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ता की रूपरेखा रखी
भारत की स्वास्थ्य-कृत्रिम बुद्धिमत्ता रूपरेखा में तेज औषधि अनुसंधान और डिजिटल स्वास्थ्य सेवा के साथ रोगी की गोपनीयता, प्रमाण-आधारित उपयोग, मानवीय चिकित्सकीय निगरानी तथा व्यापक क्रियान्वयन के लिए सहयोग पर बल दिया गया है।
मुख्य तथ्य
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मानवीय नैदानिक निर्णय का पूरक बनना है, उसका स्थान नहीं लेना है।
- रोगी की गोपनीयता, सुरक्षा, जिम्मेदारी और प्रमाण-आधारित उपयोग प्रमुख सुरक्षा आधार हैं।
- स्वास्थ्य-कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उत्कृष्टता केंद्र एम्स नई दिल्ली, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ और एम्स ऋषिकेश में हैं।
- ₹5,000 करोड़ की पीआरआईपी योजना औषधि एवं चिकित्सा-प्रौद्योगिकी अनुसंधान और उद्योग-शिक्षण सहयोग को बढ़ावा देती है।
- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने 96 करोड़ से अधिक आभा पहचान-पत्र और 1,000 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य अभिलेख डिजिटल रूप से जोड़े हैं।
- ई-संजीवनी की कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नैदानिक सहायता से 20 करोड़ से अधिक रोगियों को लाभ मिला है।
अभ्यास प्रश्न MCQ
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आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उत्कृष्टता केंद्र किन संस्थानों में हैं?
विज्ञप्ति में एम्स नई दिल्ली, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ और एम्स ऋषिकेश—तीनों को स्वास्थ्य-कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उत्कृष्टता केंद्रों के स्थान के रूप में बताया गया है।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चिकित्सकीय देखभाल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग का मूल सिद्धांत क्या है?
इसे सुरक्षित और जिम्मेदार ढंग से मानवीय नैदानिक निर्णय का पूरक बनना चाहिए, उसका स्थान नहीं लेना चाहिए; रोगी की गोपनीयता के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय भी जरूरी हैं।
स्वास्थ्य-कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उत्कृष्टता केंद्र कहां हैं?
ये एम्स नई दिल्ली, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ और एम्स ऋषिकेश में हैं।
पीआरआईपी योजना किसे बढ़ावा देती है?
₹5,000 करोड़ की यह योजना औषधि एवं चिकित्सा-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अनुसंधान और उद्योग-शिक्षण सहयोग मजबूत करने के लिए है।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत कितने डिजिटल संपर्क बताए गए?
96 करोड़ से अधिक आभा पहचान-पत्र और 1,000 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य अभिलेख स्वास्थ्य सुविधाओं और पेशेवरों के बीच डिजिटल रूप से जोड़े गए हैं।
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