2 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित पानी पर दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता की। प्रेस सूचना ब्यूरो के अनुसार यह टीम इंडिया की भावना को मज़बूत करने, सहकारी संघवाद को गहरा करने और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर केंद्र–राज्य सामूहिक ज़िम्मेदारी बढ़ाने वाली विभागीय शिखर सम्मेलन श्रृंखला का पहला सम्मेलन है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारी भारत की जल सुरक्षा पर चर्चा के लिए जुड़े।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लागू करने योग्य, समय-सीमा वाले बिंदुओं की निरंतर समीक्षा और फॉलो-अप हो ताकि सम्मेलन केवल एक बार की गतिविधि न रह जाए। शहरीकरण से जुड़ी चुनौतियों—आबादी बढ़ना और भविष्य की पानी की ज़रूरतें—पर शहरी स्थानीय निकायों को जागरूक करने तथा चिंतन शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया। पानी बचाने वाली तकनीकों को ज़्यादा अपनाने और विश्व के बेहतरीन तरीकों वाली प्रदर्शनियों व कार्यशालाओं से भारतीय निर्माताओं को असरदार समाधान बड़े पैमाने पर लागू करने में मदद करने को भी कहा।

जन भागीदारी पर बल देते हुए जल उत्सव को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। गाद निकालने को साफ़ नियम और मानक संचालन प्रक्रिया वाला नियमित कार्यक्रम बनाने को कहा। बांध सुरक्षा में हर मानसून से पहले पूरी तैयारी, तय सावधानियाँ और स्कूली छात्रों में जागरूकता—पाठ्यक्रम में शामिल करने सहित—पर ज़ोर दिया। विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जल प्रबंधन क्षमता बढ़ाने तथा जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों के व्यवस्थित अंतर-राज्यीय अध्ययन-दौरे का भी सुझाव दिया।

मज़बूत जल डेटा शासन पर बल दिया और एक समान प्रारूप से जल-क्षेत्र डेटा एकत्र व विश्लेषण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की सिफ़ारिश की। कृषि और उद्योग के लिए उपचारित पानी के उचित उपयोग से कमी से निपटने के लिए पहले से तैयारी और एकीकृत योजना पर ज़ोर दिया। गुजरात के मुख्यमंत्री के अनुभव का ज़िक्र कर कहा कि सही योजना, पक्के इरादे, ज़रूरी संसाधन और काबिल अधिकारी लगाकर कमी को अवसर में बदला जा सकता है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने चार नतीजे बताए: ढांचागत परियोजनाएँ तेज़ी से पूरा करना; जल संरक्षण को लोगों का लगातार आंदोलन बनाना; पीने योग्य स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता; और गांवों में पीने के पानी की योजनाओं का संस्थागत संचालन–रखरखाव।