केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू एवं कश्मीर के कठुआ जिले में उझ बहुउद्देशीय परियोजना की स्थिति और इसे चरणों में लागू करने की रूपरेखा की समीक्षा की। जल शक्ति मंत्रालय के अधीन भारत सरकार के उपक्रम वैपकॉस लिमिटेड को परियोजना लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है। परियोजना का काम अलग-अलग चरणों में पूरा होगा। पूरी भूमि के अधिग्रहण की प्रतीक्षा किए बिना काम शुरू किया जाएगा और बची हुई भूमि का अधिग्रहण भी साथ-साथ चलता रहेगा। कार्यान्वयन एजेंसी परियोजना स्थल और उससे जुड़ी ज़रूरतों पर भी काम कर रही है। यह परियोजना रावी की मुख्य सहायक नदी उझ पर बनाई जानी है। इसे लगभग 186 से 212 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए तैयार किया गया है। इससे करीब 90,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का पानी मिलने की उम्मीद है। इसके दायरे में जम्मू एवं कश्मीर के कठुआ और सांबा जिले तथा पंजाब के पठानकोट और गुरदासपुर जिले आएंगे। परियोजना कठुआ जिले को पीने और उद्योगों के लिए भी पानी देगी। इससे खेती की उत्पादकता बढ़ने, जल सुरक्षा बेहतर होने, आर्थिक विकास के नए अवसर बनने और केंद्र-शासित प्रदेश की सामाजिक-आर्थिक प्रगति में योगदान मिलने की उम्मीद है। सुरक्षा और सीमा प्रबंधन की दृष्टि से भी परियोजना अहम है। गृह मंत्रालय अनियंत्रित जल प्रवाह रोकने और नदी के रास्ते सीमा पार घुसपैठ की आशंका वाले मार्ग बंद करने के लिए इसका समर्थन कर रहा है। डॉ. सिंह ने गुणवत्ता और सुरक्षा बनाए रखते हुए काम को बेहतर ढंग से करने, हितधारकों के बीच तालमेल बढ़ाने, प्रभावी निगरानी रखने और समय पर काम पूरा करने पर जोर दिया।
भूमि अधिग्रहण के साथ चरणों में आगे बढ़ेगी उझ बहुउद्देशीय परियोजना
उझ बहुउद्देशीय परियोजना का काम चरणों में शुरू होगा और बची हुई भूमि का अधिग्रहण साथ-साथ चलेगा। इससे बिजली उत्पादन, सिंचाई, जल आपूर्ति, सामाजिक-आर्थिक प्रगति और सीमा प्रबंधन में मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्य तथ्य
- पूरी भूमि के अधिग्रहण की प्रतीक्षा किए बिना परियोजना का काम चरणों में आगे बढ़ेगा।
- जल शक्ति मंत्रालय के अधीन उपक्रम वैपकॉस लिमिटेड परियोजना लागू करने के लिए जिम्मेदार है।
- उझ रावी की मुख्य सहायक नदी है और परियोजना को लगभग 186 से 212 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए तैयार किया गया है।
- जम्मू एवं कश्मीर और पंजाब के चार जिलों में करीब 90,000 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का पानी मिलने की उम्मीद है।
- कठुआ जिले को पीने और उद्योगों के लिए भी पानी मिलने की उम्मीद है।
- अनियंत्रित जल प्रवाह रोकने और घुसपैठ की आशंका वाले नदी मार्ग बंद करने के उद्देश्य से भी परियोजना को समर्थन मिला है।
6-अक्ष वर्गीकरण
अभ्यास प्रश्न MCQ
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उझ बहुउद्देशीय परियोजना के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह रावी की मुख्य सहायक नदी उझ पर बनाई जानी है और इसे लगभग 186 से 212 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए तैयार किया गया है। 2. इसका प्रस्तावित सिंचाई क्षेत्र केवल जम्मू एवं कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों तक सीमित है। उपर्युक्त में से कौन-सा कथन सही है?
कथन 1 सही है। परियोजना रावी की मुख्य सहायक नदी उझ पर बनाई जानी है और इसकी निर्धारित बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 186 से 212 मेगावाट है। कथन 2 गलत है, क्योंकि प्रस्तावित सिंचाई क्षेत्र में पंजाब के पठानकोट और गुरदासपुर जिले भी शामिल हैं।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उझ बहुउद्देशीय परियोजना को कैसे लागू किया जाएगा?
इसे चरणों में पूरा किया जाएगा। बची हुई भूमि का अधिग्रहण चलता रहेगा और परियोजना का काम भी शुरू हो जाएगा।
परियोजना लागू करने की जिम्मेदारी किस एजेंसी को दी गई है?
जल शक्ति मंत्रालय के अधीन भारत सरकार के उपक्रम वैपकॉस लिमिटेड को यह जिम्मेदारी दी गई है।
किन क्षेत्रों को सिंचाई का पानी मिलने की उम्मीद है?
कठुआ, सांबा, पठानकोट और गुरदासपुर जिलों में करीब 90,000 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का पानी मिलने की उम्मीद है।
कठुआ जिले के लिए किस तरह की जल आपूर्ति की योजना है?
परियोजना से जिले को पीने और उद्योगों के लिए पानी मिलने की उम्मीद है।
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