केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने 223 तापीय विद्युत इकाइयों को नवीकरण एवं आधुनिकीकरण या जीवन-विस्तार के संभावित उम्मीदवारों के रूप में चुना है। दिसंबर 2022 तक इन सभी इकाइयों की आयु 20 वर्ष से अधिक थी। बिजली की मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर पैदा न हो, इसलिए इन पर काम नौ चरणों में किया जाना है।

यह प्रक्रिया भारत सरकार द्वारा 16 मार्च 2022 को गठित एक समिति की रिपोर्ट के बाद शुरू हुई। समिति में एनटीपीसी लिमिटेड, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, गुजरात राज्य विद्युत निगम लिमिटेड और भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के प्रतिनिधि शामिल थे। समिति ने कोयला आधारित तापीय विद्युत स्टेशनों के जीवन-विस्तार तथा नवीकरण एवं आधुनिकीकरण के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया और नवीकरण एवं आधुनिकीकरण दिशानिर्देश, 2023 के रूप में अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद प्राधिकरण ने संबंधित पक्षों से सलाह करके संभावित इकाइयों की पहचान की।

चरणबद्ध कार्यक्रम जनवरी 2024 से जून 2046 तक चलेगा और इसमें कुल 63,440 मेगावाट क्षमता शामिल है। कुल 223 इकाइयों में केंद्रीय क्षेत्र की 81 इकाइयां और 26,040 मेगावाट, राज्य क्षेत्र की 116 इकाइयां और 28,870 मेगावाट तथा निजी क्षेत्र की 26 इकाइयां और 8,530 मेगावाट क्षमता है। पहले चरण में 7,960 मेगावाट की 37 इकाइयां और दूसरे चरण में 8,310 मेगावाट की 30 इकाइयां रखी गई हैं।

फिलहाल केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश सहित देश में कहीं भी तापीय विद्युत संयंत्रों के आधुनिकीकरण या उन्नयन के लिए न तो धन देती है और न ही इसके लिए कोई केंद्रीय क्षेत्र योजना है। व्यवहार्यता जांचने के बाद उत्पादन कंपनी से इन कार्यों के लिए व्यावसायिक रूप से धन जुटाने की अपेक्षा की गई है। यह जानकारी विद्युत राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक ने 6 अगस्त 2026 को लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।