अमर उजाला की 5 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, शेखावाटी के 14 क्षेत्रों की ऐतिहासिक हवेलियाँ यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल हुई हैं। रिपोर्ट में यह जानकारी राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के हवाले से दी गई है। बताए गए क्षेत्रों में अलसीसर, मंडावा, नवलगढ़, झुंझुनू, चूरू और सीकर शामिल हैं। यह अस्थायी सूची की बात है, विश्व धरोहर का अंतिम दर्जा मिलने की नहीं।

ये हवेलियाँ अपनी अलग निर्माण शैली, विशाल प्रवेश द्वारों, नक्काशीदार झरोखों और रंगीन भित्तिचित्रों के लिए जानी जाती हैं। दीवारों और छतों के चित्रों में धार्मिक तथा पौराणिक प्रसंगों के साथ सामाजिक जीवन, राजसी वैभव और समय के बदलाव दिखाई देते हैं। कलाकारों ने अपने दौर में सामने आई नई वस्तुओं तथा घटनाओं को भी चित्रों में जगह दी थी। इसलिए इन चित्रों का विषय केवल धर्म तक सीमित नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार, अस्थायी सूची में आने के बाद संरक्षण, वैज्ञानिक दस्तावेज़ीकरण और दीर्घकालिक प्रबंधन का काम आगे बढ़ाया जाना है। इन तैयारियों के बाद अगले चरण के लिए औपचारिक नामांकन भेजा जाएगा। विरासत की स्थिति समझाते समय अस्थायी पहचान और अंतिम सूची में शामिल होने के बीच यह अंतर बनाए रखना ज़रूरी है।

अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ने से पर्यटन, स्थानीय हस्तकला और रोज़गार के अवसरों को सहारा मिलने की उम्मीद है। साथ ही ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण को प्रोत्साहन मिल सकता है। ये रिपोर्ट में बताई गई संभावनाएँ हैं, पहले ही सिद्ध परिणाम नहीं। अभी मुख्य महत्व शेखावाटी की वास्तुकला और चित्रकला पर बढ़े ध्यान तथा इन ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण और दस्तावेज़ीकरण के प्रस्तावित काम का है।