राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में लंबे समय से हो रही देरी पर राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और ओबीसी राजनीतिक आरक्षण आयोग को सख्त और समयबद्ध निर्देश दिए हैं। अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने साफ कहा कि चुनाव कराने में अब कोई और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और अगर देरी जारी रही तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने 20 जुलाई की सुनवाई में राज्य निर्वाचन आयुक्त और ओबीसी आयोग के सचिव को वर्चुअली पेश कराया। सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 19 जुलाई को हुई बैठक का फैसला और प्रस्तावित चुनाव कार्यक्रम अदालत के सामने रखा।
अदालत ने राजनीतिक आरक्षण पर रिपोर्ट सौंपने के लिए ओबीसी आयोग को 5 अगस्त 2026 की आख़िरी मोहलत दी और कहा कि इसमें कोई ढील नहीं मिलेगी। कोर्ट ने माना कि आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक हफ़्ता या ज़्यादा से ज़्यादा आठ दिन काफ़ी हैं, इसलिए राज्य निर्वाचन आयोग 15 अगस्त 2026 तक चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दे।
सबसे अहम बात यह कि अदालत ने कहा कि अगर 5 अगस्त तक ओबीसी रिपोर्ट नहीं आती, तब भी आरक्षण की लॉटरी पूरी की जाए ताकि चुनाव और न टलें — रिपोर्ट का इंतज़ार अब चुनाव टालने का आधार नहीं रहेगा। खंडपीठ ने यह भी निर्देश दिया कि पूरी चुनाव प्रक्रिया 15 नवंबर 2026 तक हर हाल में पूरी हो जाए, और अवमानना याचिकाओं का निस्तारण कर दिया।
