रेल मंत्रालय के तहत भारतीय रेलवे ने दक्षिण पूर्वी रेलवे पर निमपुरा पश्चिम आउटर केबिन और मिदनापुर के बीच 14.52 किमी लंबी तीसरी लाइन के निर्माण को 440 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दे दी है। यह देश के अहम माल ढुलाई गलियारों में से एक पर रेल क्षमता बढ़ाने और उच्च घनत्व वाले मार्गों पर यात्री तथा मालगाड़ियों की तेज़ आवाजाही की दिशा में बड़ा कदम है। यह खंड उच्च उपयोग नेटवर्क (एचयूएन-2) मार्ग का हिस्सा है, जहाँ निमपुरा पश्चिम आउटर केबिन-गोकुलपुर खंड फ़िलहाल सिंगल लाइन है और दोहरीकरण का काम पहले से जारी है। अतिरिक्त तीसरी लाइन से इस रणनीतिक रूप से अहम गलियारे पर लाइन क्षमता काफ़ी बढ़ेगी और परिचालन में लचीलापन आएगा। यह मार्ग यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई के लिए भी ख़ूब इस्तेमाल होता है, जिस पर मैंगनीज, लौह अयस्क, कंटेनर, कोयला, क्लिंकर, लोहा-इस्पात, गेहूँ, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद, चूना पत्थर, जिप्सम, उर्वरक और खाद्य तेल जैसी प्रमुख वस्तुएँ ढोई जाती हैं, और कुल माल भार लगभग 2.38 करोड़ टन प्रति वर्ष है। मौजूदा खंड 115.71 प्रतिशत क्षमता उपयोग पर चल रहा है, जो भारी भीड़भाड़ दर्शाता है। नई लाइन से बढ़ती माँग को संभालने के लिए अतिरिक्त क्षमता बनेगी और पूरे गलियारे की कार्यकुशलता सुधरेगी। परियोजना पूरी होने पर हर साल 35 लाख टन अतिरिक्त माल ढुलाई की उम्मीद है। बेहतर ढाँचा आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही आसान करेगा, अड़चनें घटाएगा, नेटवर्क की भरोसेमंदी बढ़ाएगा और इस पर निर्भर उद्योगों की कनेक्टिविटी मज़बूत कर आर्थिक विकास को सहारा देगा।