आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने कैपेसिटीज (CapaCITIES) कार्यक्रम के एक दशक पूरा होने पर 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में 'शहरी जलवायु लचीलापन को बढ़ाना: कैपेसिटीज की विरासत और आगे का रास्ता' कार्यक्रम आयोजित किया। ICLEI दक्षिण एशिया और राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान (NIUA) द्वारा आयोजित इस आयोजन में भारतीय शहरों में स्थानीय जलवायु क्षमताओं के निर्माण के दस वर्षों की समीक्षा की गई। भारत और भूटान स्थित स्विट्जरलैंड दूतावास द्वारा वित्त पोषित और 2016 में शुरू किया गया यह कार्यक्रम शहरी गवर्नेंस में कम कार्बन उत्सर्जन और जलवायु-लचीले विकास को मुख्यधारा में लाने में मदद करता रहा है तथा भारत के 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य का समर्थन करता है। इसे ICLEI दक्षिण एशिया, साउथ पोल और ईकॉन्सेप्ट के माध्यम से लागू किया गया, जिसमें NIUA ज्ञान भागीदार रहा। कार्यक्रम ने अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा, कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली, सिलीगुड़ी और उदयपुर — इन आठ शहरों तथा गुजरात और तमिलनाडु की राज्य सरकारों को सहायता दी। एक दशक में इसने आठ शहरों में नेट-जीरो जलवायु-लचीली शहर कार्य योजनाएं (CRCAP) शुरू कीं, छह शहरों में स्थायी जलवायु कार्रवाई प्रकोष्ठ बनाए, और कोयंबटूर में 154 kWp का तैरता सौर संयंत्र, राजकोट में हरित परिवहन क्षेत्र, तिरुनेलवेली में बाढ़ पूर्व-चेतावनी प्रणाली तथा वडोदरा में मियावाकी शहरी वानिकी जैसी पायलट परियोजनाएं दीं। 35 से अधिक शहरों ने CRCAP पद्धति अपनाई और 1,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया। इस अवसर पर नेट-जीरो जलवायु-लचीली पद्धति टूलकिट सहित तीन ज्ञान उत्पाद जारी किए गए। क्षमता निर्माण का यह ढांचा भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका और मलेशिया तक भी विस्तारित किया गया।
कैपेसिटीज कार्यक्रम ने भारत में शहरी जलवायु लचीलापन के निर्माण का एक दशक पूरा किया
भारत ने 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में स्विट्जरलैंड द्वारा वित्त पोषित कैपेसिटीज कार्यक्रम के दस वर्ष पूरे होने का आयोजन किया, जिसमें आठ शहरों में कम कार्बन एवं जलवायु-लचीले शहरी विकास के एक दशक की समीक्षा की गई और तीन नए ज्ञान उत्पाद जारी किए गए।
मुख्य तथ्य
- कैपेसिटीज कार्यक्रम ने एक दशक पूरा किया; 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में ICLEI दक्षिण एशिया और NIUA द्वारा आयोजित कार्यक्रम में इसका जश्न मनाया गया।
- भारत और भूटान स्थित स्विट्जरलैंड दूतावास द्वारा वित्त पोषित और 2016 में शुरू किया गया कैपेसिटीज भारत के 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य का समर्थन करता है।
- इसे ICLEI दक्षिण एशिया, साउथ पोल और ईकॉन्सेप्ट के माध्यम से लागू किया गया, जिसमें राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान (NIUA) ज्ञान भागीदार रहा।
- अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा, कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली, सिलीगुड़ी और उदयपुर — इन आठ शहरों ने नेट-जीरो जलवायु-लचीली शहर कार्य योजनाएं (CRCAP) अपनाईं।
- पायलट परियोजनाओं में कोयंबटूर में 154 kWp का तैरता सौर संयंत्र, राजकोट में 100 ई-ऑटो वाला हरित परिवहन क्षेत्र और वडोदरा में मियावाकी शहरी वानिकी शामिल रहीं; यह ढांचा भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका और मलेशिया तक विस्तारित हुआ।
अभ्यास प्रश्न MCQ
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कैपेसिटीज कार्यक्रम के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:\n1. यह भारत और भूटान स्थित स्विट्जरलैंड दूतावास द्वारा वित्त पोषित था और 2016 में शुरू किया गया था।\n2. यह भारत के 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने के लक्ष्य का समर्थन करता है।\nऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
दोनों कथन सही हैं। कैपेसिटीज (भारत में कम कार्बन एवं जलवायु-लचीले शहरी विकास पर क्षमता निर्माण परियोजना) भारत और भूटान स्थित स्विट्जरलैंड दूतावास द्वारा वित्त पोषित था और 2016 में शुरू किया गया था। स्थानीय क्षमताओं को मजबूत कर तथा शहर स्तर की कार्रवाई को राष्ट्रीय मिशनों एवं राज्य लक्ष्यों से जोड़कर यह भारत के 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य का समर्थन करता है।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कैपेसिटीज कार्यक्रम क्या है?
कैपेसिटीज — भारत में कम कार्बन एवं जलवायु-लचीले शहरी विकास पर क्षमता निर्माण परियोजना — 2016 में शुरू किया गया और भारत तथा भूटान स्थित स्विट्जरलैंड दूतावास द्वारा वित्त पोषित एक कार्यक्रम है, जो भारतीय शहरों को कम कार्बन एवं जलवायु-लचीले विकास को मुख्यधारा में लाने में मदद करता है।
कैपेसिटीज को किन संस्थाओं ने लागू किया?
इसे ICLEI दक्षिण एशिया, साउथ पोल और ईकॉन्सेप्ट के माध्यम से लागू किया गया, जिसमें राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान (NIUA) ज्ञान भागीदार रहा।
कैपेसिटीज भारत के जलवायु लक्ष्यों का समर्थन कैसे करता है?
स्थानीय क्षमताओं को मजबूत कर और शहर स्तर की कार्रवाई को राष्ट्रीय मिशनों एवं राज्य लक्ष्यों से जोड़कर यह भारत के 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य का समर्थन करता है।
किन शहरों को कार्यक्रम से लाभ मिला?
अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा, कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली, सिलीगुड़ी और उदयपुर — इन आठ शहरों तथा गुजरात और तमिलनाडु सरकारों को सहायता मिली।
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