सहकारिता मंत्रालय सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रित अनाज भंडारण योजना लागू कर रहा है, ताकि प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के ज़रिए उत्पादन केंद्रों के नज़दीक भंडारण मज़बूत हो। योजना 31 मई 2023 को प्रायोगिक परियोजना के रूप में शुरू हुई। इसका मकसद भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण सुधारना है। मौजूदा सरकारी योजनाओं को जोड़कर सहकारिता आधारित एकीकृत ढाँचा अपनाया गया है, जिसे संस्थागत समन्वय और वित्तीय सहायता का सहारा मिला है।

प्रायोगिक चरण में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, तेलंगाना, असम, कर्नाटक और त्रिपुरा—इन 11 राज्यों के 11 पैक्स में गोदाम बने और 9,750 मीट्रिक टन क्षमता तैयार हुई। जुलाई 2026 तक योजना के तहत 1012 पैक्स या सहकारी समितियों की पहचान हो चुकी थी और 313 पैक्स में गोदाम निर्माण पूरा हो चुका था, जिससे 1.80 लाख मीट्रिक टन से अधिक भंडारण क्षमता बनी।

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम कार्यान्वयन एजेंसी है और राष्ट्रीय, राज्य व ज़िला स्तर पर समन्वय से काम चलता है। कृषि अवसंरचना कोष, कृषि विपणन अवसंरचना योजना, कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना का मेल पैक्स को एकीकृत ग्रामीण सेवा केंद्र बनाने में मदद करता है। सुविधाओं में कस्टम हायरिंग सेंटर, उचित दर की दुकानें, प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयाँ, खरीद केंद्र तथा 50, 100 और 200 मीट्रिक टन क्षमता वाले साइलो या गोदाम शामिल हैं।

कृषि विपणन अवसंरचना योजना में सब्सिडी 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 33.33 प्रतिशत की गई, मार्जिन मनी 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत की गई, और नाबार्ड की पुनर्वित्त सुविधा के साथ कृषि अवसंरचना कोष की 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी जोड़ने पर पैक्स के लिए प्रभावी ऋण ब्याज दर लगभग 1 प्रतिशत रह जाती है। निर्धारित शर्तों पर भारतीय खाद्य निगम पात्र गोदाम अनिवार्य रूप से किराए पर ले सकता है। महाराष्ट्र के अमरावती स्थित नेरपिंगलाई पैक्स ने 3,000 मीट्रिक टन का गोदाम बनाया है; लगभग 300 किसान करीब 32,000 बोरियाँ सोयाबीन जमा कर रहे हैं, समिति ने करीब 4.50 करोड़ रुपये अग्रिम दिए और किराए से सालाना करीब 7.68 लाख रुपये तथा ब्याज से करीब 54 लाख रुपये आय की उम्मीद है।