10 अगस्त 2026 तक राजस्थान के 693 बांधों में कुल 1,302.909 करोड़ घन मीटर क्षमता के मुकाबले 649.048 करोड़ घन मीटर पानी था। इस तरह कुल जलभराव 49.82% रहा। पिछले साल इसी समय स्थिति काफी बेहतर थी। तब बांधों में 1,003.397 करोड़ घन मीटर पानी था, जो कुल क्षमता का 77.01% था। मानसून सक्रिय रहने और कई जिलों में लगातार बारिश होने के बावजूद इस साल पानी का स्तर पिछले साल से लगभग 27% कम रहा।

बांधों की अलग-अलग स्थिति भी कम जलभराव की ओर इशारा करती है। राज्य के 693 बांधों में से 223 पूरी तरह खाली थे, 454 आंशिक रूप से भरे थे और केवल 16 ही पूरी तरह भर पाए थे। अलग-अलग क्षेत्रों के आंकड़ों में भी बड़ा अंतर दिखा। कोटा 62.74% जलभराव के साथ सबसे आगे रहा, जबकि बांसवाड़ा 51.06% के साथ दूसरे स्थान पर था। जयपुर में 48.88%, उदयपुर में 38.35% और भरतपुर में 35.71% पानी दर्ज किया गया। जोधपुर में सबसे कम 18.49% जलभराव था।

प्रमुख बांधों में कोटा बैराज का जलभराव सबसे अधिक 96.43% था। जवाहर सागर में 70.96% और राणा प्रताप सागर में 67.23% पानी था। जयपुर और अन्य क्षेत्रों की जलापूर्ति से जुड़े बीसलपुर बांध में जलभराव 65.07% रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि राज्य का कुल जलभराव आधी क्षमता से भी कम था और अलग-अलग क्षेत्रों तथा बांधों की स्थिति में काफी अंतर था। कोटा क्षेत्र सबसे आगे रहा, लेकिन राजस्थान में बड़ी संख्या में बांध या तो खाली थे या केवल आंशिक रूप से भरे थे।