प्रति बूंद अधिक फ़सल (पीडीएमसी) एक केंद्र प्रायोजित योजना है। यह खेत स्तर पर पानी के बेहतर उपयोग और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए बूंद-बूंद सिंचाई—ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणालियों—को बढ़ावा देती है। 29 अगस्त 2026 की प्रेस सूचना ब्यूरो पृष्ठभूमि टिप्पणी के अनुसार जुलाई 2026 तक योजना ने 115 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को बूंद-बूंद सिंचाई के अंतर्गत लाया है, जो भारत के शुद्ध बोए क्षेत्र का लगभग 8.11 प्रतिशत है।

देश के उपलब्ध जल संसाधनों का 80 प्रतिशत से अधिक कृषि सिंचाई में लगता है, पर शुद्ध बोए क्षेत्र का लगभग आधा ही सिंचित है; इसलिए जल दक्षता सुधारना राष्ट्रीय प्राथमिकता है। पीडीएमसी के अंतर्गत प्रति लाभार्थी अधिकतम पाँच हेक्टेयर तक बूंद-बूंद सिंचाई लगाने के लिए वित्तीय सहायता मिलती है: छोटे और सीमांत किसानों को लागत का 55 प्रतिशत, अन्य किसानों को 45 प्रतिशत तक। पिछले तीन वर्षों में केंद्र ने 8,123.24 करोड़ रुपये जारी किए; कुछ राज्य अतिरिक्त सब्सिडी देते हैं। सात वर्ष बाद उसी ज़मीन पर दोबारा सहायता मिल सकती है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और डिजिटल क्रियान्वयन से पारदर्शिता और सस्ती सुविधाओं तक पहुँच सुधरी है।

वर्ष 2022-23 से पीडीएमसी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) के अंतर्गत लागू है। 2025-26 में पीएम-आरकेवीवाई के लिए 8,957.72 करोड़ रुपये जारी या स्वीकृत हुए, जिनमें पीडीएमसी के लिए 3,226.36 करोड़ रुपये शामिल हैं। 2025-26 में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात और राजस्थान में योजना के अंतर्गत सबसे अधिक क्षेत्र दर्ज हुआ। योजना से 12.30 लाख किसान लाभान्वित हुए; इनमें लगभग 20 प्रतिशत महिलाएँ थीं। फर्टिगेशन को प्रोत्साहन है, पानी की कमी और गिरते भूजल वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता है, और संशोधित दिशानिर्देशों में डिग्गी जैसी स्थानीय जल भंडारण व संचयन गतिविधियों पर पहले की खर्च सीमा हटा दी गई है।