1 अगस्त 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने देश भर के अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में प्रोजेक्ट सारथी के विस्तार पर उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मंडाविया भी मौजूद थे। चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर में परियोजना के कामकाज और असर की समीक्षा के साथ इसे केंद्र सरकार के अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में लागू करने पर विचार हुआ।

प्रोजेक्ट सारथी का लक्ष्य प्रशिक्षित युवा स्वयंसेवकों की मदद से मरीजों का अस्पताल अनुभव बेहतर बनाना और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में समुदाय की भागीदारी बढ़ाना है। रोगी-केंद्रित सेवा केवल इलाज तक सीमित नहीं है। मरीजों और उनके साथ आए लोगों को समय पर मार्गदर्शन, ज़रूरी मदद और संवेदनशील सहयोग भी मिलना चाहिए। सुनियोजित स्वयंसेवी सहायता से स्वास्थ्यकर्मी चिकित्सकीय जिम्मेदारियों पर बेहतर ध्यान दे सकते हैं।

पीजीआईएमईआर में स्वयंसेवकों ने मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने, व्हीलचेयर और स्ट्रेचर की सहायता पाने, जांच सेवाओं तक पहुंचने तथा दूसरे गैर-चिकित्सकीय कामों में मदद दी है। 2,500 से अधिक स्वयंसेवक जुटे हैं और उन्होंने 1.5 लाख से अधिक घंटे सेवा दी है। सामुदायिक चिकित्सा विभाग के अध्ययन में सहायता पाने वाले मरीजों के अस्पताल तक पहुंचने के कुल समय में 26% कमी दर्ज हुई।

बैठक में परियोजना को युवा मामले एवं खेल मंत्रालय की माई भारत पहल से जोड़ने की समीक्षा भी हुई। चर्चा में व्यवस्थित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, डिजिटल निगरानी, स्वयंसेवकों का पंजीकरण और उपस्थिति, मरीजों की प्रतिक्रिया तथा आभा आईडी बनाना शामिल था। देशव्यापी रूपरेखा पर चर्चा में संस्थागत व्यवस्था, माई भारत से तालमेल, डिजिटल जुड़ाव और सुरक्षा उपाय शामिल थे, ताकि स्वयंसेवक चिकित्सकीय या प्रशासनिक जिम्मेदारियां लिए बिना स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग दें।