पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के बारे में फैल रहे दावों पर स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय के अनुसार, भारत में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम की शुरुआत 2001 में पायलट के रूप में हुई और 2006 में ई5 लागू किया गया। औसत मिश्रण 2013-14 के लगभग 1.53% से बढ़कर 2025-26 के नवंबर-जून में 20% तक पहुँचा।

स्पष्टीकरण में कहा गया है कि ई15 से अधिक मिश्रण वाला ईंधन साढ़े तीन वर्ष से अधिक समय से और ई19-ई20 ढाई वर्ष से अधिक समय से बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। 20 करोड़ से अधिक दो-पहिया वाहन और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें इनसे चलीं। इथेनॉल मिश्रण के कारण इंजन खराब होने या वाहन बेकार हो जाने का कोई पक्का प्रमाण नहीं मिला।

कंपनियों के सर्विस आँकड़े भी दिए गए। एक प्रमुख कंपनी ने 2025-26 में 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विस की। इनमें 1.5 करोड़ से अधिक ऐसे पुराने वाहन थे जिन्हें मूल रूप से ई20 के अनुकूल प्रमाणित नहीं किया गया था। इनमें ई20 से जुड़ी असामान्य जंग, घिसाव या पुर्ज़ों की उम्र घटने की समस्या नहीं मिली। एक अन्य कंपनी ने ई20 से चलने वाले 1.4 करोड़ वाहनों पर लंबे समय तक नज़र रखी और इथेनॉल के कारण जंग का प्रमाण नहीं पाया।

मंत्रालय ने माना कि ई10 के लिए बने कुछ पुराने वाहनों में ईंधन की बचत लगभग 3-5% घट सकती है। वाहन चलाने का तरीका, यातायात, रखरखाव, टायर का दबाव और वातानुकूलन भी माइलेज को प्रभावित करते हैं। अधिक मिश्रण से पहले सामग्री की अनुकूलता, इंजन सेटिंग, चलने की क्षमता, टिकाऊपन, उत्सर्जन, ईंधन प्रणाली और प्रदर्शन की जाँच की गई। इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बीआईएस मानकों के अनुरूप है और तेल विपणन कंपनियाँ मिलावट तथा गुणवत्ता जाँच के लिए 30,000 से अधिक बिक्री केंद्रों का निरीक्षण करती हैं।