पंजाब सरकार ने पड़ोसी राज्यों राजस्थान और हरियाणा को नदी जल आपूर्ति तथा नहरों के रखरखाव से जुड़े बकाए के भुगतान के लिए नोटिस भेजे हैं। जल संसाधन मंत्री बरिंदर गोयल के अनुसार, राजस्थान से 1961 से 2025 तक नदी जल के उपयोग की रॉयल्टी और मुआवजे के रूप में ₹1.44 लाख करोड़ मांगे गए हैं। अंतिम मांग नोटिस में राजस्थान को 30 दिन के भीतर राशि जमा करने को कहा गया है। भुगतान नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

पंजाब ने राजस्थान के विरुद्ध अपने दावे का आधार 1920 में महाराजा बीकानेर के साथ हुए समझौते को बताया है। इसी समझौते के तहत पंजाब से राजस्थान को पानी जा रहा है। गोयल ने कहा कि राजस्थान 1960-61 तक इस पानी का भुगतान करता रहा। इसके बाद पिछली सरकारों ने बिना कारण बताए राशि लेना बंद कर दिया। मौजूदा सरकार अब उसी बकाए की वसूली कर रही है। पंजाब का कहना है कि 1920 के समझौते के आधार पर रॉयल्टी बकाया है, जबकि राजस्थान पहले ऐसे दावों को खारिज कर चुका है।

हरियाणा से की गई मांग का आधार अलग है। पंजाब ने भाखड़ा मेन लाइन और अन्य साझा नहरों के संचालन तथा रखरखाव का खर्च मांगा है। हरियाणा ने 2015-16 से रखरखाव का भुगतान बंद कर दिया था और बकाया ₹312 करोड़ बताया गया है। पंजाब के मुख्य सचिव ने हरियाणा के मुख्य सचिव को तुरंत भुगतान के लिए पत्र लिखा है। गोयल के अनुसार, भाखड़ा मेन लाइन और दूसरी नहरों के रखरखाव का पूरा खर्च पंजाब उठा रहा है। बकाया राशि नहीं मिलने पर कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है। इस तरह राजस्थान से मांग नदी जल की रॉयल्टी और मुआवजे की है, जबकि हरियाणा से मांग साझा नहरों के संचालन और रखरखाव के खर्च की है।