2 सितंबर 2026 को केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू की अध्यक्षता में पट्टे पर विमान लेने और भुगतान के लिए धन की व्यवस्था करने संबंधी उच्च स्तरीय समिति की पहली बैठक हुई। समिति ने बढ़ते विमानन क्षेत्र के अनुरूप भारत में मज़बूत और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी विमान पट्टे तथा वित्तपोषण तंत्र बनाने के उपायों पर चर्चा की।
बैठक में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा, अपर सचिव पुनीत कंसल, मंत्रालय के अन्य अधिकारी, वित्त मंत्रालय, वाणिज्य विभाग, नागर विमानन महानिदेशालय, भारतीय रिजर्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी तथा उद्योग संघों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष गिफ्ट सिटी में पहला विमान लीजिंग शिखर सम्मेलन हुआ था। हितधारकों ने केप टाउन समझौते की पुष्टि का सुझाव दिया था, जिसे विमान वस्तुओं में हितों का संरक्षण कानून लागू कर पूरा किया गया। इस वर्ष दूसरे सम्मेलन में उद्योग ने उच्च स्तरीय समिति बनाने को कहा; आज उसकी पहली बैठक हो रही है। उन्होंने विमान लीजिंग को स्थापित और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य कारोबार बताया तथा कानूनी-नियामकीय उपायों से जोखिमों का समाधान हो रहा है कहा। विमानन के लिए अधिक बैंक ऋण और लीजिंग में तकनीकी व कौशल विकास के लिए संयुक्त उपक्रम पहचानने का भी सुझाव दिया।
सरकारी कोशिशों के सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र से 422 परिसंपत्तियाँ—जिनमें 250 विमान और 87 इंजन शामिल हैं—पट्टे पर दी गई हैं और 474 लीजिंग समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। हर 45 दिन में एक नया हवाई अड्डा काम शुरू हो रहा है, पर विमान उपलब्धता बड़ी बाधा है। भारतीय विमानन कंपनियों के बेड़े में 85 प्रतिशत से अधिक विमान पट्टे पर हैं, इसलिए लीजिंग तंत्र मज़बूत करने के लिए हितधारकों से निरंतर संवाद ज़रूरी है।
समिति ने कराधान, नियामकीय ढांचा, वित्त उपलब्धता और कारोबार सुगमता पर भी चर्चा की। इसमें रुपये में मूल्यांकित विमान वित्तपोषण, सामान्य कर-परिहार निरोध नियम पर अधिक स्पष्टता तथा आयरलैंड के साथ दोहरे कराधान से बचाव समझौते पर पुनर्विचार की संभावना शामिल रहीं। समिति सहमत हुई कि प्रस्तावित उपायों की मंत्रालयों, विभागों और हितधारकों से परामर्श कर समीक्षा हो, ताकि पूर्वानुमेय नीतिगत ढांचा बने।
