केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने 28 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में भारत 6जी गठबंधन की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में भारत 6जी विजन के तहत हुए काम को परखा गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह विजन दस्तावेज़ 22 मार्च 2023 को जारी किया था। इसका लक्ष्य 2030 तक 6जी तकनीक के डिज़ाइन, विकास और उपयोग में भारत को प्रमुख योगदानकर्ता बनाना है।

गठबंधन सात विशेष कार्यकारी समूहों के ज़रिए काम करता है। इनके दायरे में स्पेक्ट्रम, उपकरण तकनीक और विनिर्माण व्यवस्था, तकनीक, उपयोग, हरित और टिकाऊ विकास, संपर्क-विस्तार तथा 6जी के उपयोग और आय के तरीके आते हैं। सदस्य संगठनों ने 5जी और 6जी तकनीक से जुड़े 7,700 से ज़्यादा पेटेंट आवेदन किए हैं। इनमें 4,400 से ज़्यादा आवेदन विदेशों में किए गए हैं।

3जीपीपी में भारत की भागीदारी भी बढ़ी है। भारतीय प्रतिभागियों की संख्या 2020 में 717 थी, जो 2025 में बढ़कर 1,787 हो गई। इसी दौरान तकनीकी योगदान 196 से बढ़कर 2,943 हो गए। समीक्षा में भारतीय दूरसंचार मानक विकास संस्था के 6जी मानकीकरण संबंधी काम की जानकारी भी दी गई। वैश्विक मानक तय करने की प्रक्रिया में भारत की सक्रिय और सार्थक भागीदारी पर ज़ोर रहा।

चर्चा में स्वदेशी शोध और विकास को तेज़ करने, नए उपयोग खोजने, स्पेक्ट्रम रणनीति मज़बूत करने, ऊर्जा-कुशल और टिकाऊ तकनीक को बढ़ावा देने तथा उपकरणों, पुर्ज़ों, सेंसर और विनिर्माण में घरेलू क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया गया। सिंधिया ने सातों कार्यकारी समूहों के बीच सहयोग बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय 6जी समूहों के मुकाबले भारत की प्रगति का आकलन करने को कहा। व्यापक लक्ष्य सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत, स्टार्टअप और शोध संस्थानों के सहयोग से शोध, नवाचार, मानक, विनिर्माण और बाज़ार में उपयोग को जोड़ना है।