कृषि यांत्रिकीकरण पर सब-मिशन (एसएमएएम) के ज़रिए देशभर में कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें छोटे व सीमांत किसानों, महिला किसानों, वंचित वर्गों और पूर्वोत्तर राज्यों (एनईआर) पर खास ध्यान है। 2014-15 में शुरू यह योजना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत केंद्र प्रायोजित स्कीम है; आरकेवीवाई खुद 2007 में शुरू हुई थी और 2017-18 में आरकेवीवाई-रफ्तार के रूप में पुनर्गठित हुई।

2014-15 से 2025-26 तक 9,404.47 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता से किसानों को 21.61 लाख कृषि मशीनें दी जा चुकी हैं। साथ ही, 52.5 करोड़ रुपये की मदद से 40,918 हेक्टेयर में 40,928 से ज़्यादा ड्रोन प्रदर्शन आयोजित हुए हैं। योजना ने 27,554 कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी), 646 हाई-टेक हब और 25,608 फार्म मशीनरी बैंक (एफएमबी) बनाने में मदद की है, जिससे किसान मशीनें खरीदने की बजाय किराए पर ले सकते हैं।

व्यक्तिगत स्वामित्व के लिए डीबीटी से सामान्य वर्ग को 40 प्रतिशत और एससी/एसटी, छोटे-सीमांत किसानों व एनईआर लाभार्थियों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है, साथ ही ड्रोन सेवाओं पर प्रति हेक्टेयर 2,000 रुपये की सहायता भी। सीएचसी को 250 लाख रुपये तक की परियोजना पर 40 प्रतिशत और एफएमबी को 30 लाख रुपये तक पर 80 प्रतिशत मदद मिलती है, एनईआर में यह क्रमशः 100 और 95 प्रतिशत तक जाती है। व्यक्तिगत स्वामित्व वाले लाभार्थी 2020-21 के 2.07 लाख से बढ़कर 2024-25 में 2.32 लाख हो गए हैं।