प्रकाशित: 8 जुलाई 2026PIBअर्थव्यवस्था
एसएमएएम: कृषि यांत्रिकीकरण से बढ़ रही खेती की उत्पादकता
कृषि यांत्रिकीकरण पर सब-मिशन (एसएमएएम) के ज़रिए देशभर में कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें छोटे व सीमांत किसानों, महिला किसानों, वंचित वर्गों और पूर्वोत्तर राज्यों (एनईआर) पर खास ध्यान है। 2014-15 में शुरू यह योजना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत केंद्र प्रायोजित स्कीम है; आरकेवीवाई खुद 2007 में शुरू हुई थी और 2017-18 में आरकेवीवाई-रफ्तार के रूप में पुनर्गठित हुई।
2014-15 से 2025-26 तक 9,404.47 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता से किसानों को 21.61 लाख कृषि मशीनें दी जा चुकी हैं। साथ ही, 52.5 करोड़ रुपये की मदद से 40,918 हेक्टेयर में 40,928 से ज़्यादा ड्रोन प्रदर्शन आयोजित हुए हैं। योजना ने 27,554 कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी), 646 हाई-टेक हब और 25,608 फार्म मशीनरी बैंक (एफएमबी) बनाने में मदद की है, जिससे किसान मशीनें खरीदने की बजाय किराए पर ले सकते हैं।
व्यक्तिगत स्वामित्व के लिए डीबीटी से सामान्य वर्ग को 40 प्रतिशत और एससी/एसटी, छोटे-सीमांत किसानों व एनईआर लाभार्थियों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है, साथ ही ड्रोन सेवाओं पर प्रति हेक्टेयर 2,000 रुपये की सहायता भी। सीएचसी को 250 लाख रुपये तक की परियोजना पर 40 प्रतिशत और एफएमबी को 30 लाख रुपये तक पर 80 प्रतिशत मदद मिलती है, एनईआर में यह क्रमशः 100 और 95 प्रतिशत तक जाती है। व्यक्तिगत स्वामित्व वाले लाभार्थी 2020-21 के 2.07 लाख से बढ़कर 2024-25 में 2.32 लाख हो गए हैं।
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6-अक्ष वर्गीकरण
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कृषि यांत्रिकीकरण पर सब-मिशन (एसएमएएम) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एसएमएएम को 2007 में केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में शुरू किया गया था।
2. एसएमएएम के तहत सामान्य श्रेणी के किसानों को व्यक्तिगत स्वामित्व वाली मशीनों के लिए 100 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या · सही उत्तर Dदोनों कथन गलत हैं। एसएमएएम 2007 में नहीं, बल्कि 2014-15 में शुरू हुई थी और यह केंद्रीय क्षेत्र की नहीं बल्कि आरकेवीवाई के तहत केंद्र प्रायोजित योजना है। साथ ही, सामान्य श्रेणी के किसानों को व्यक्तिगत स्वामित्व वाली मशीनों पर डीबीटी के ज़रिए 100 प्रतिशत नहीं बल्कि 40 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है; 100 प्रतिशत तक सब्सिडी केवल एनईआर में लघु मशीनों पर उपलब्ध है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एसएमएएम क्या है?
एसएमएएम (कृषि यांत्रिकीकरण पर सब-मिशन) 2014-15 में शुरू की गई केंद्र प्रायोजित योजना है, जो राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत छोटे-सीमांत किसानों, महिला किसानों और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के लिए कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देती है।
एसएमएएम किस योजना के तहत लागू है?
एसएमएएम राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत केंद्र प्रायोजित स्कीम के रूप में लागू है; आरकेवीवाई 2007 में शुरू हुई थी और 2017-18 में इसे आरकेवीवाई-रफ्तार के रूप में पुनर्गठित किया गया।
अब तक एसएमएएम के तहत कितनी वित्तीय सहायता दी जा चुकी है?
2014-15 से 2025-26 तक एसएमएएम के तहत 9,404.47 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता से किसानों को 21.61 लाख कृषि मशीनें दी जा चुकी हैं।
व्यक्तिगत स्वामित्व वाली मशीनों पर किसानों को कितनी सब्सिडी मिलती है?
सामान्य वर्ग के किसानों को डीबीटी के ज़रिए 40 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है, जबकि एससी/एसटी, छोटे-सीमांत किसानों और एनईआर लाभार्थियों को 50 प्रतिशत तक।
कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) और फार्म मशीनरी बैंक (एफएमबी) क्या हैं?
ये एसएमएएम के तहत बनाए गए केंद्र हैं, जहां किसान मशीनें खरीदने की बजाय किराए पर ले सकते हैं; अब तक 27,554 सीएचसी और 25,608 एफएमबी स्थापित किए जा चुके हैं।