2016 में शुरू हुआ स्टार्ट-अप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम, दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की उप-योजना है। यह स्वयं सहायता समूह सदस्यों और उनके परिवारों को गैर-कृषि छोटे उद्यम शुरू करने में मदद करता है। कार्यक्रम आर्थिक व संस्थागत सहायता, उद्यम प्रबंधन और व्यवहार-कौशल प्रशिक्षण, उद्यम विकास सेवाएँ, बैंकिंग पहुँच तथा सरकारी योजनाओं से तालमेल देता है। स्थानीय धन और सहायता के फ़ैसले समुदाय की भागीदारी से होते हैं।

30 जून 2026 तक कार्यक्रम ने देशभर में 4.32 लाख ग्रामीण व्यवसायों को सहायता दी थी। लगभग 86% उद्यमी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक और अन्य पिछड़ा वर्ग समुदायों से थे। कम से कम 60% लाभार्थियों का महिला होना ज़रूरी है। उद्यम सहायता से जुड़े कम से कम 90% सामुदायिक कार्यकर्ता स्वयं सहायता समूह परिवारों से चुने जाते हैं और उनमें कम से कम 60% महिलाएँ होती हैं। हर कार्यकर्ता 50 उद्यमियों तक को मार्गदर्शन दे सकता है।

कार्यक्रम राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों के ज़रिए लागू होता है। इसमें प्रति प्रखंड ₹6.50 करोड़ और प्रति उद्यम औसतन ₹27,083 निवेश का प्रावधान है। प्रखंड केंद्र अमल में सहायता करते हैं, प्रशिक्षित सामुदायिक कार्यकर्ता तकनीकी सहयोग देते हैं, बैंक पात्र उद्यमियों को धन देते हैं और सामुदायिक संस्थाएँ लाभार्थियों की पहचान, ऋण प्रबंधन तथा निगरानी करती हैं। डिजिटल साधन व्यवसाय योजना, ऋण आकलन और उद्यम की प्रगति पर नज़र रखने में मदद करते हैं।

भारतीय गुणवत्ता परिषद के मध्यावधि आकलन में 99% सहायता-प्राप्त उद्यम लाभ में पाए गए। परिवार की कुल आय में उनका योगदान 57% और औसत मासिक कमाई लगभग ₹39,000 थी। विनिर्माण उद्यमों की औसत मासिक कमाई ₹47,800 रही, 96% उद्यमियों ने बचत बढ़ने की बात कही और 75% उद्यम महिलाओं के स्वामित्व या प्रबंधन में थे। ये नतीजे ग्रामीण स्वरोज़गार, आय-वृद्धि और सामाजिक समावेश में कार्यक्रम की भूमिका दिखाते हैं।