राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने पंजाब में लेक्चरर भर्ती के दौरान आरक्षण सुरक्षा लागू नहीं किए जाने की शिकायत पर जाँच के आदेश दिए हैं। पत्र सूचना कार्यालय की 5 सितंबर 2026 की विज्ञप्ति के अनुसार, आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल किया है।
राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ की शिकायत पंजाब शिक्षा विभाग के घोषित 1,013 लेक्चरर पदों से जुड़ी है। आरोप है कि अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों को आरक्षण का लाभ नहीं मिला और कई विषयों में निर्धारित आरक्षण नियमों तथा रोस्टर का ठीक से पालन नहीं हुआ। ये जाँच के दायरे में आए आरोप हैं; इन्हें जाँच से पहले ही सिद्ध उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
आयोग ने पंजाब के मुख्य सचिव को नोटिस भेजकर उससे जुड़े तथ्य, आरोपों पर की गई कार्रवाई और संबंधित रिकॉर्ड माँगे हैं। जवाब के लिए नोटिस मिलने से सात दिन का समय दिया गया है। माँगे गए रिकॉर्ड में भर्ती की अधिसूचना और आरक्षण रोस्टर भी शामिल हैं। आयोग ने कहा है कि तय समय में उत्तर नहीं आने पर वह अनुच्छेद 338 के तहत सिविल अदालत की शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है और व्यक्तिगत उपस्थिति के लिए समन जारी कर सकता है।
आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने कथित रूप से आरक्षण लाभ से वंचित करने को गंभीर मामला बताया। उन्होंने अनुसूचित जातियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और सरकारी सेवाओं में आरक्षण प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। संवैधानिक अध्ययन की दृष्टि से मुख्य बात यह है कि आयोग ने सुरक्षा उपायों से जुड़ी शिकायत की जाँच और जानकारी माँगने के लिए अनुच्छेद 338 की शक्तियों का इस्तेमाल किया।
