श्रम और रोजगार मंत्रालय के अधीन ईपीएफओ ने पात्र प्रतिष्ठानों से आग्रह किया है कि वे विश्वास, 2026 के तहत लंबे समय से लंबित ईपीएफ क्षतिपूर्ति विवाद कम दरों पर निपटाएँ। उच्च न्यायालयों ने योजना का समर्थन किया है। प्रेस सूचना ब्यूरो ने 3 सितंबर 2026 को दिल्ली से यह जानकारी दी।

भारत सरकार ने विश्वास, 2026 एकमुश्त निपटान योजना शुरू की है, जिससे नियोक्ता कम जुर्माना चुकाकर लंबे समय से लंबित विवाद समाप्त कर सकते हैं। योजना 28 दिसंबर 2026 तक खुली रहेगी और आवेदन की अंतिम तिथि आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।

सामान्य नियमों में पीएफ जमा की देरी पर जुर्माना प्रति वर्ष 37% तक हो सकता है। विश्वास अधिनियम, 2026 में यह 2 महीने तक की देरी पर 0.25% प्रति माह, 2 से 4 महीने पर 0.50% प्रति माह और 4 महीने से अधिक पर 1% प्रति माह है।

बॉम्बे उच्च न्यायालय (पुणे पीठ) ने रिट याचिका संख्या 4246/2018 में नियोक्ता को दो सप्ताह में आवेदन का निर्देश दिया और अधिकरण आदेश संशोधित कर याचिका का निस्तारण किया। मद्रास उच्च न्यायालय ने रिट याचिका संख्या 38008/2024 का निपटारा तब किया जब नियोक्ता ने योजना का लाभ लेने की इच्छा जताई। केरल उच्च न्यायालय (एर्नाकुलम पीठ) ने उन्नीस मामलों में समान निर्देश दिए।

14 जून 2024 से पहले के विलंबित पीएफ अंशदान मामले निर्दिष्ट श्रेणियों में आने पर विचार योग्य हो सकते हैं—न्यायालय या न्यायाधिकरण में लंबित जुर्माना कार्यवाही, अधूरी वसूली वाला जुर्माना आदेश, अंतिम आदेश से पहले का नोटिस, या नोटिस के बिना दर्ज देरी।

प्रक्रिया ऑनलाइन है। पहले बकाया ब्याज चुकाना होगा; फिर ईपीएफओ नियोक्ता पोर्टल के विश्वास 2026 मॉड्यूल पर दस्तावेज़ और डिजिटल प्रमाणीकरण के ज़रिए आवेदन पूरा करना होगा। सिस्टम संशोधित जुर्माना गिनेगा। भुगतान के लिए 15 दिन और ज़रूरत पर अतिरिक्त 15 दिन मिलते हैं। भुगतान पुष्टि पर ईपीएफओ डिजिटल निपटान प्रमाणपत्र जारी करता है और संबंधित कार्यवाही समाप्त हो जाती है। देश भर के 153 क्षेत्रीय कार्यालयों में विश्वास प्रकोष्ठ व सहायता डेस्क हैं; हेल्पलाइन 1800-180-1820 भी उपलब्ध है।