राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम सितंबर 2019 में शुरू किया गया। इसका उद्देश्य देशव्यापी टीकाकरण और निगरानी के जरिए खुरपका-मुंहपका रोग तथा ब्रूसेलोसिस को नियंत्रित कर उनका उन्मूलन करना है। कार्यक्रम में सभी पात्र पशुओं को खुरपका-मुंहपका रोग से बचाने के लिए साल में 2 बार 100 प्रतिशत टीकाकरण और 4–8 माह की बछियों को ब्रूसेलोसिस से बचाने के लिए जीवन में एक बार टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ रोग निगरानी, शीत शृंखला व्यवस्था, कान में पहचान-पट्ट लगाना, पशु पंजीकरण और टीकाकरण से पहले तथा बाद में नमूना परीक्षण भी किए जाते हैं।
कार्यक्रम के तहत खुरपका-मुंहपका रोग के 147.16 करोड़ टीके लगाए जा चुके हैं, जिनसे 8.04 करोड़ किसानों को लाभ मिला। इस रोग के दर्ज मामले 2019 के 132 से घटकर 2025 में 40 रह गए, जबकि ब्रूसेलोसिस के मामले 22 से घटकर 15 हो गए। गैर-संरचनात्मक प्रोटीन प्रतिरक्षियों की मौजूदगी भी 20.8 प्रतिशत से घटकर 8.1 प्रतिशत रह गई। पिछले 3 वर्षों में एशिया-1 प्रकार से उत्पन्न खुरपका-मुंहपका रोग का कोई मामला सामने नहीं आया। टीकाकरण के बाद निगरानी में ओ, ए और एशिया-1 प्रकारों के विरुद्ध औसत सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा क्रमशः 78.1 प्रतिशत, 71.7 प्रतिशत और 77.6 प्रतिशत मिली।
जुलाई 2026 तक भारत पशुधन पोर्टल पर 39.00 करोड़ से अधिक पशु पंजीकृत थे और हर पशु को 12 अंकों की विशिष्ट पहचान दी गई थी। 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 4,019 सचल पशु चिकित्सा इकाइयां निःशुल्क दूरभाष संख्या 1962 के जरिए घर पर सेवा देती हैं। इनसे 136 लाख किसानों को लाभ मिला और 276 लाख पशुओं का उपचार हुआ। व्यापक ढांचे में राष्ट्रीय कार्यक्रम को समाहित करने वाले पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम के लिए 2026–27 में ₹2,010 करोड़ का कुल बजट परिव्यय रखा गया है।
