ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित लोकसेवा भवन के राज्य सम्मेलन केंद्र में ‘मिशन जीरो: स्वच्छता कार्य में होने वाली मौतों को समाप्त करना’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें भारत सरकार और ओडिशा सरकार के प्रतिनिधि, शहरी स्थानीय निकाय, स्वच्छता क्षेत्र की संस्थाएं, नागरिक समाज संगठन, प्रौद्योगिकी एवं उपकरण प्रदाता और स्वच्छता कर्मचारी शामिल हुए। कार्यशाला का केंद्र संस्थागत तंत्र मजबूत करना, उपयुक्त प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना, कामकाजी तत्परता सुनिश्चित करना और शहरों में मशीनीकृत स्वच्छता सेवाओं का विस्तार करना था। समग्र लक्ष्य स्वच्छता कार्यों में होने वाली मौतों को शून्य तक लाना है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत ने इसे प्रमुख राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया और सुरक्षित, व्यवस्थित तथा सम्मानजनक सेवाओं के लिए पूरी सरकार के समन्वित दृष्टिकोण पर बल दिया। नमस्ते और गरिमा योजनाओं के माध्यम से मशीनीकरण को बढ़ावा देने के साथ स्वच्छता कर्मचारियों एवं उनके आश्रितों के लिए व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका के अवसर सुनिश्चित किए जा रहे हैं। 2024 में शुरू किए गए स्वच्छता सारथी/कचरा बीनने वाले घटक ने कचरा बीनने वालों को सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण पहलों के दायरे में जोड़ा। नमस्ते कार्यक्रम को 2031 तक बढ़ाया गया है, ताकि आपातकालीन प्रतिक्रिया स्वच्छता इकाइयों के माध्यम से व्यवस्थित सेवा वितरण हो, मिशन जीरो आगे बढ़े और कर्मचारियों तथा उनके परिवारों तक कल्याणकारी उपाय व्यापक रूप से पहुंचें। कार्यशाला में अनुभवों, नवाचारों और व्यावहारिक समाधानों पर चर्चा हुई। कर्मचारियों की सुरक्षा और कार्यकुशलता बढ़ाने वाले उपकरण प्रदर्शित किए गए। कचरा बीनने वालों और स्वच्छता कर्मचारियों के ‘कचरे से धन’ स्वयं सहायता समूहों ने आजीविका, उद्यमिता और टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन के अवसर भी सामने रखे।
स्वच्छता कार्यों में मौतें समाप्त करने के लिए मिशन जीरो को आगे बढ़ाती राष्ट्रीय कार्यशाला
भुवनेश्वर की कार्यशाला ने संस्थागत तैयारी, मशीनीकरण, कर्मचारी सुरक्षा और समन्वित कार्रवाई के जरिए मिशन जीरो को आगे बढ़ाया। इसमें नमस्ते कार्यक्रम के 2031 तक विस्तार तथा स्वच्छता कर्मचारियों, उनके परिवारों और कचरा बीनने वालों के कल्याण व आजीविका सहायता पर भी जोर रहा।
मुख्य तथ्य
- राष्ट्रीय कार्यशाला ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित लोकसेवा भवन में आयोजित हुई।
- मिशन जीरो मशीनीकरण, संस्थागत तैयारी और कर्मचारी सुरक्षा के माध्यम से स्वच्छता कार्यों में मौतें शून्य करना चाहता है।
- नमस्ते और गरिमा योजनाएं मशीनीकरण के साथ स्वच्छता कर्मचारियों एवं उनके आश्रितों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका को सहारा देती हैं।
- सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए स्वच्छता सारथी/कचरा बीनने वाला घटक 2024 में शुरू किया गया।
- नमस्ते कार्यक्रम 2031 तक बढ़ाया गया है और आपातकालीन प्रतिक्रिया स्वच्छता इकाइयां व्यवस्थित सेवा वितरण में सहायक हैं।
अभ्यास प्रश्न MCQ
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मिशन जीरो के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कार्यशाला का उद्देश्य संस्थागत तंत्र मजबूत करना और शहरों में मशीनीकृत स्वच्छता सेवाओं का विस्तार करना था। 2. स्वच्छता सारथी/कचरा बीनने वाला घटक 2031 में शुरू किया गया। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
कथन 1 सही है: संस्थागत तंत्र मजबूत करना और शहरों में मशीनीकृत स्वच्छता सेवाओं का विस्तार करना कार्यशाला के घोषित उद्देश्य थे। कथन 2 गलत है: स्वच्छता सारथी/कचरा बीनने वाला घटक 2031 में नहीं, 2024 में शुरू किया गया था।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मिशन जीरो का समग्र लक्ष्य क्या है?
इसका लक्ष्य स्वच्छता कार्यों में होने वाली मौतों को शून्य तक लाना है।
कार्यशाला की प्रमुख कामकाजी प्राथमिकताएं क्या थीं?
संस्थागत तंत्र मजबूत करना, उपयुक्त प्रौद्योगिकियां बढ़ाना, कामकाजी तत्परता सुनिश्चित करना और शहरों में मशीनीकृत सेवाओं का विस्तार करना इसकी प्राथमिकताएं थीं।
नमस्ते और गरिमा योजनाएं स्वच्छता कर्मचारियों को कैसे सहारा देती हैं?
ये मशीनीकरण को बढ़ावा देती हैं और कर्मचारियों तथा उनके आश्रितों के लिए व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं आजीविका के अवसर सुनिश्चित करती हैं।
नमस्ते कार्यक्रम कब तक बढ़ाया गया है?
इसे 2031 तक बढ़ाया गया है।
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