पीएम केयर्स (प्रधानमंत्री की नागरिक सहायता और आपातकालीन स्थितियों में राहत) फंड ने मंगलवार (18 अगस्त 2026) को लंबे विलंब के बाद 2023-24 और 2024-25 के लेखापरीक्षित वित्तीय विवरण जारी किए। वित्तीय वर्ष 2022-23 के बाद से वार्षिक प्रकटीकरण अपलोड नहीं हुए थे; द हिंदू ने 8 अगस्त को इस चूक की ओर इशारा किया था। सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात और अन्य आपदाओं में राहत के लिए मार्च 2020 में स्थापित यह सार्वजनिक धर्मार्थ न्यास प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में चलता है और पूरी तरह स्वैच्छिक योगदान से चलता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में घरेलू दान 30% घटकर लगभग ₹479 करोड़ रह गए, जबकि विदेशी दान 18% घटकर ₹92.8 लाख रह गए। फंड ने बताया कि 2024-25 में प्राप्त दान 592% बढ़कर लगभग ₹480 करोड़ हो गए। शुद्ध दान, बैंक व सावधि जमा पर ब्याज और क्रियान्वयन एजेंसियों की वापसी मिलाकर कुल आवक ₹1,279.9 करोड़ रही। इसके मुकाबले खर्च केवल ₹87.85 लाख हुआ — आवक का 0.1% और अंतिम शेष का 0.01%। अंतिम शेष ₹8,452.06 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष से 17.8% अधिक है। मार्च 2020 से 31 मार्च 2025 तक फंड ने अपनी कुल आय का 18.7% ही खर्च किया। 2024-25 में क्रियान्वयन एजेंसियों ने ₹324 करोड़ वापस किए, पर स्वरूप, कारण या एजेंसियों के नाम का विवरण नहीं दिया गया। राष्ट्रीय सूचना के अधिकार अभियान की सह-संयोजक अंजलि भारद्वाज ने बेकार पड़े बड़े शेष और गोपनीयता की आलोचना की और कहा कि फंड अभी भी आरटीआई अधिनियम, संसदीय जाँच और नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की लेखापरीक्षा से बाहर है। प्रधानमंत्री पदेन अध्यक्ष हैं और केंद्रीय कैबिनेट मंत्री न्यासी हैं; सरकार का रुख है कि यह न्यास आरटीआई के तहत लोक प्राधिकरण नहीं है। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने कंपनी अधिनियम के संबंधित नियमों में पूर्वव्यापी संशोधन भी किया।
पीएम केयर्स फंड ने वित्तीय वर्ष 2024-25 की आवक का 0.1% ही खर्च किया; कोष ₹8,452 करोड़ पर
कई वर्षों के प्रकटीकरण अंतराल के बाद पीएम केयर्स ने वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के लेखापरीक्षा विवरण जारी किए, जिनमें ₹1,279.9 करोड़ आवक के मुकाबले केवल ₹87.85 लाख खर्च (0.1%) और ₹8,452.06 करोड़ का अंतिम कोष दिखा; आलोचकों ने सीमित खर्च तथा आरटीआई व नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक जाँच से बाहर रहने पर सवाल उठाए।
मुख्य तथ्य
- वित्तीय वर्ष 2022-23 के बाद से रुके प्रकटीकरण के बाद 18 अगस्त 2026 को 2023-24 और 2024-25 के लेखापरीक्षित विवरण जारी हुए।
- वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल आवक ₹1,279.9 करोड़ रही; खर्च ₹87.85 लाख (आवक का 0.1%; अंतिम शेष का 0.01%)।
- अंतिम शेष ₹8,452.06 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष से 17.8% अधिक है।
- घरेलू दान 30% घटकर लगभग ₹479 करोड़ और विदेशी दान 18% घटकर ₹92.8 लाख रह गए; प्राप्त दान 592% बढ़कर लगभग ₹480 करोड़ भी बताए गए।
- मार्च 2020 से 31 मार्च 2025 तक कुल आय का 18.7% खर्च हुआ; 2024-25 में क्रियान्वयन एजेंसियों ने ₹324 करोड़ वापस किए।
- फंड आरटीआई अधिनियम, संसदीय जाँच और नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक लेखापरीक्षा से बाहर है; प्रधानमंत्री पदेन अध्यक्ष और केंद्रीय कैबिनेट मंत्री न्यासी हैं।
अभ्यास प्रश्न MCQ
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पीएम केयर्स फंड के वित्तीय वर्ष 2024-25 के लेखापरीक्षित आँकड़ों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फंड ने ₹87.85 लाख खर्च किए, जो ₹1,279.9 करोड़ की कुल आवक का 0.1% है। 2. फंड का अंतिम शेष ₹8,452.06 करोड़ रहा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
दोनों कथन लेखापरीक्षा प्रकटीकरण से मेल खाते हैं: खर्च ₹87.85 लाख रहा (₹1,279.9 करोड़ आवक का 0.1%), और अंतिम शेष ₹8,452.06 करोड़ था।
स्रोत: द हिन्दू
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वित्तीय वर्ष 2024-25 में पीएम केयर्स ने आवक के मुकाबले कितना खर्च किया?
कुल आवक ₹1,279.9 करोड़ के मुकाबले खर्च ₹87.85 लाख रहा — आवक का 0.1% और ₹8,452.06 करोड़ के अंतिम शेष का 0.01%।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में घरेलू और विदेशी दान का क्या हाल रहा?
घरेलू दान 30% घटकर लगभग ₹479 करोड़ रह गए और विदेशी दान 18% घटकर ₹92.8 लाख रह गए।
नवीनतम लेखापरीक्षा विवरण कब जारी हुए?
18 अगस्त 2026 को वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के लिए जारी हुए; वित्तीय वर्ष 2022-23 के बाद से वार्षिक प्रकटीकरण अपलोड नहीं हुए थे।
क्या पीएम केयर्स फंड आरटीआई अधिनियम और नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक लेखापरीक्षा के अधीन है?
नहीं। आलोचकों के अनुसार यह आरटीआई अधिनियम, संसदीय जाँच और नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की लेखापरीक्षा से बाहर है; सरकार का कहना है कि न्यास आरटीआई के तहत लोक प्राधिकरण नहीं है।
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