ग्रामीण विकास मंत्रालय दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ा रहा है। राजस्थान सहित देश भर में इसके लिए खुदरा दुकानें, सरस मेले और डिजिटल विपणन प्लेटफॉर्म इस्तेमाल किए जा रहे हैं। मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार राजस्थान समेत सभी राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अपने राज्य में हर वर्ष कम से कम दो सरस मेले आयोजित कर सकते हैं। राजस्थान ग्रामीण आजीविका मिशन, यानी राजीविका, ने बाजार की संभावनाओं और स्थानीय ज़रूरतों को देखते हुए सरस मेलों के स्थान चुने हैं। उसने राज्य के स्वयं सहायता समूह ब्रांड के तहत खुदरा दुकानें खोलने के लिए भी स्थानों की पहचान की है।

यह सहायता राजस्थान के छोटे शहरों, ग्रामीण क्षेत्रों और आकांक्षी जिलों की महिलाओं तक भी पहुंचती है। विपणन से जुड़ी पहलों में राज्य स्तर पर समूहों के ब्रांड बनाना, पैकेजिंग, लेबलिंग और उत्पाद मानकीकरण का प्रशिक्षण देना तथा सरस मेलों, प्रदर्शनियों और व्यापार मेलों में भागीदारी शामिल है। समूहों के उत्पाद ई-सारस और दूसरे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी सूचीबद्ध किए जाते हैं। क्षमता बढ़ाने के कार्यक्रमों में डिजिटल विपणन पर ध्यान दिया जाता है। निर्यात के लिए तैयार उत्पादों को चुनिंदा व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों में जगह दिलाने की व्यवस्था भी है।

राष्ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्थान समूह सदस्यों के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम चलाता है। इनमें उत्पाद विकास, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता सुधार, डिजिटल विपणन, उद्यम प्रबंधन, निर्यात प्रक्रिया और दस्तावेज तथा बाजार की तैयारी शामिल हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक समूह सदस्यों की पहुंच मजबूत करना है। ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।