सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग द्वारा अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही छात्रवृत्ति योजनाओं के अंतर्गत केंद्र सरकार ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में ₹19,216.46 करोड़ दिए। कुल राशि 2023-24 के ₹6,094.48 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹6,200.59 करोड़ और 2025-26 में ₹6,921.39 करोड़ हो गई। इन योजनाओं में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति, अनुसूचित जाति और अन्य के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति, उच्च स्तरीय शिक्षा योजना तथा अनुसूचित जाति और अन्य पात्र अभ्यर्थियों के लिए राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति शामिल हैं। तीन वर्षों में मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति के अंतर्गत ₹17,224.63 करोड़ दिए गए। इसकी सालाना राशि ₹5,475.42 करोड़ से बढ़कर ₹5,562.26 करोड़ और फिर ₹6,186.95 करोड़ हुई। इसी अवधि में प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए ₹1,469.92 करोड़, उच्च स्तरीय शिक्षा योजना के लिए ₹304.29 करोड़ और राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति के लिए ₹217.62 करोड़ जारी किए गए। मैट्रिकोत्तर और प्री-मैट्रिक छात्रवृत्तियाँ केंद्र प्रायोजित योजनाएँ हैं। इनमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपना हिस्सा जारी करते हैं, जिसके बाद विभाग केंद्रीय पोर्टल से केंद्र का हिस्सा देता है। राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति और उच्च स्तरीय शिक्षा योजना केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएँ हैं। राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति की राशि भारतीय मिशनों को प्राधिकरण पत्र के आधार पर अग्रिम दी जाती है, जबकि उच्च स्तरीय शिक्षा योजना की राशि पात्र विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से सीधे मिलती है। सरकार के अनुसार, आधार से जुड़े बैंक खातों में भुगतान से प्रक्रिया सुगम हुई और देरी घटी है। विभाग देरी से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए नियमित समीक्षा, क्षमता निर्माण कार्यक्रम, तकनीकी सहायता, राष्ट्रीय स्तर के चिंतन शिविर और कार्यशालाएँ भी आयोजित करता है। इनमें राज्य, केंद्र शासित प्रदेश और अन्य हितधारक भाग लेते हैं। श्रेयस-एससी के अंतर्गत उच्च स्तरीय शिक्षा योजना केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, इसलिए इसमें राज्यवार या जिलावार आवंटन नहीं होता।