राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने राजस्थान सरकारी स्वास्थ्य योजना में जांचों और दावों को अलग-अलग करने की आशंका की विस्तृत पड़ताल शुरू की है। योजना के एक महीने के आंकड़ों के विश्लेषण में 238 लाभार्थियों से जुड़े 479 प्रकरण सामने आए। करीब 50 निजी अस्पताल और 60 चिकित्सक जांच के दायरे में हैं। सबसे अधिक मामले जोधपुर, जयपुर, उदयपुर और अलवर में मिले। योजना में ₹2,000 से अधिक लागत वाली जांच के लिए पूर्व-अनुमोदन जरूरी है। शुरुआती आशंका है कि कुछ अस्पतालों ने इस प्रक्रिया से बचने और अधिक भुगतान पाने के लिए जांचों को बांटकर अलग-अलग दावे पेश किए। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ के अनुसार, एक ही बीमारी के इलाज से जुड़ी अलग-अलग जांचों के लिए मरीजों को 3-4 बार अस्पताल बुलाने की बात सामने आई है। परियोजना अधिकारी डॉ. निधि पटेल ने बताया कि जांचें अलग-अलग कराने से मरीजों को बेवजह कई बार अस्पताल जाना पड़ा। बार-बार बुलाए गए लोगों में महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे। इससे मरीजों को परेशानी हुई और योजना के दुरुपयोग की आशंका बढ़ी। जांच में यह परखा जा रहा है कि अस्पतालों और चिकित्सकों ने अधिक दावा पाने या पूर्व-अनुमोदन से बचने के लिए जानबूझकर जांचें और दावे बांटे या नहीं। अनियमितता सिद्ध होने पर संबंधित अस्पतालों और चिकित्सकों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। योजना का उद्देश्य लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं देना तथा उन्हें अनावश्यक जांचों और अस्पताल के चक्करों से बचाना है। विभाग पारदर्शिता बनाए रखने और सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए आंकड़ों के विश्लेषण से ऐसे मामलों की लगातार निगरानी कर रहा है।
आरजीएचएस में जांच और दावे बांटने की आशंका की पड़ताल
राजस्थान में 238 लाभार्थियों से जुड़े 479 आरजीएचएस प्रकरणों की जांच हो रही है, जिनमें पूर्व-अनुमोदन से बचने के लिए जांचें और दावे बांटने की आशंका है। करीब 50 निजी अस्पताल और 60 चिकित्सक जांच के दायरे में हैं।
मुख्य तथ्य
- आरजीएचएस के एक महीने के आंकड़ों के विश्लेषण में 238 लाभार्थियों से जुड़े 479 प्रकरण मिले।
- करीब 50 निजी अस्पताल और 60 चिकित्सक जांच के दायरे में हैं।
- आरजीएचएस में ₹2,000 से अधिक लागत वाली जांच के लिए पूर्व-अनुमोदन जरूरी है।
- एक ही बीमारी से जुड़ी अलग-अलग जांचों के लिए महिलाओं और बुजुर्गों समेत मरीजों को 3-4 बार बुलाने की बात सामने आई।
- विभाग जांच कर रहा है कि अधिक दावा पाने या पूर्व-अनुमोदन से बचने के लिए जांचें और दावे जानबूझकर बांटे गए या नहीं।
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
आरजीएचएस दावों की जांच के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एक महीने के आंकड़ों के विश्लेषण में 238 लाभार्थियों से जुड़े 479 प्रकरण सामने आए। 2. केवल सरकारी अस्पताल जांच के दायरे में हैं। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
कथन 1 सही है: एक महीने के विश्लेषण में 238 लाभार्थियों से जुड़े 479 प्रकरण मिले। कथन 2 गलत है: केवल सरकारी अस्पताल नहीं, बल्कि करीब 50 निजी अस्पताल जांच के दायरे में हैं।
स्रोत: अमर उजाला
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आरजीएचएस के आंकड़ों के विश्लेषण में क्या सामने आया?
एक महीने में 238 लाभार्थियों से जुड़े 479 प्रकरण सामने आए।
कितने अस्पताल और चिकित्सक जांच के दायरे में हैं?
करीब 50 निजी अस्पताल और 60 चिकित्सक जांच के दायरे में हैं।
आरजीएचएस में पूर्व-अनुमोदन कब जरूरी है?
₹2,000 से अधिक लागत वाली जांच के लिए पूर्व-अनुमोदन जरूरी है।
विभागीय जांच में क्या परखा जा रहा है?
यह परखा जा रहा है कि अधिक दावा पाने या पूर्व-अनुमोदन से बचने के लिए जांचें और दावे जानबूझकर बांटे गए या नहीं।
क्या यह उपयोगी था?
सुधार या छूटा परीक्षा दृष्टिकोण संपादकीय टीम को भेजें।
प्रतिक्रिया भेजें