राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने दिल्ली-एनसीआर में चल रहे उद्योगों के संशोधित कणीय पदार्थ उत्सर्जन मानकों से जुड़े अपने वैधानिक निदेश संख्या 98 में बदलाव किया है। ये मानक अब 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। 20 फरवरी 2026 को अधिसूचित निदेश संख्या 98 में दिल्ली-एनसीआर के चिन्हित उद्योग वर्गों के लिए 50 मिलीग्राम प्रति सामान्य घन मीटर की एकसमान और कड़ी सीमा तय की गई थी। यह सीमा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तकनीकी सिफ़ारिशों और आईआईटी कानपुर के अध्ययनों पर आधारित थी। आयोग ने दोहराया कि इस सीमा को तकनीकी रूप से हासिल किया जा सकता है और औद्योगिक उत्सर्जन घटाने तथा क्षेत्र की परिवेशी वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए यह पर्यावरण की दृष्टि से ज़रूरी है। निदेश जारी होने के बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के साथ मिलकर काम किया। संबंधित एजेंसियों को निदेश दिए गए, वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की स्थापना और पुराने उपकरणों में बदलाव की निगरानी के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया तथा अमल की समय-समय पर समीक्षा की गई। उद्योग संघों ने बताया कि उपकरणों की खरीद और स्थापना में अतिरिक्त समय लग रहा है, पर्याप्तता आकलन करने वाली एजेंसियाँ सीमित हैं और अनुपालन जाँचने वाली मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की क्षमता भी कम है। इसके बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने समय-सीमा बढ़ाने की सिफ़ारिश की। आयोग ने सभी अभ्यावेदनों की जाँच के बाद माना कि सीमित मोहलत से उत्सर्जन घटाने के उद्देश्य पर असर डाले बिना प्रभावी और एकसमान अनुपालन में मदद मिलेगी। निदेश के खंड 21 के पहले उपखंड में आने वाले सभी उद्योगों पर नई समय-सीमा लागू होगी; निदेश संख्या 98 के बाकी प्रावधान और शर्तें नहीं बदलेंगी।