बूंदी के रामगढ़ विषधारी बाघ संरक्षित क्षेत्र को अधिसूचित हुए करीब चार वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन इसके संकटग्रस्त मुख्य क्षेत्र के आठ राजस्व गांवों के लगभग 3,000 निवासी अब भी पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ग्रामीणों को वन्यजीवों, खासकर बाघों की बढ़ती आवाजाही से खतरा बना हुआ है। रामगढ़ विषधारी को मई 2022 में देश का 52वां और राजस्थान का चौथा बाघ संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था। इसका कुल क्षेत्रफल 1,501.89 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 481.90 वर्ग किलोमीटर से अधिक का मुख्य क्षेत्र और परिधीय क्षेत्र शामिल हैं। घोषणा के बाद स्वैच्छिक पुनर्वास शुरू हुआ। पहले चरण में परिधीय क्षेत्र के गुलखेड़ी, भेरूपुरा आंतरी और भीमगंज गांव चुने गए। गुलखेड़ी के करीब 70 प्रतिशत परिवार घर खाली कर चुके हैं और 88 मकान गिराए जा चुके हैं। चिन्हित 215 परिवारों में से 213 ने मुआवजा पैकेज चुन लिया है, जबकि दो परिवारों ने अभी निर्णय नहीं लिया। भेरूपुरा के 264 परिवारों में से करीब 150 को ₹3 लाख की पहली किस्त मिल चुकी है। दूसरी किस्त राज्य के बजट से राशि मिलने पर दी जाएगी। भारा धुंधला के करीब 60 परिवारों के दस्तावेजों की जांच चल रही है। मुआवजे के तीन विकल्प हैं। नकद विकल्प में प्रत्येक पात्र परिवार को किस्तों में ₹15 लाख मिलते हैं। भूमि विकल्प में वैकल्पिक कृषि भूमि, ₹3.75 लाख नकद और बड़े भू-स्वामियों के लिए अधिकतम 1.25 बीघा अतिरिक्त भूमि का प्रावधान है। गैर-निवासी भू-स्वामियों के लिए जिला स्तरीय समिति की दर से 2.5 से 3 गुना मुआवजा तय है। अधिकारियों के अनुसार उपयुक्त भूमि, बजट राशि और समर्पित कर्मचारियों की कमी प्रमुख अड़चनें हैं। खटकर के पास करीब 244 हेक्टेयर वन भूमि को आरक्षित श्रेणी से बाहर करने के प्रस्ताव को मई में पहले चरण की मंजूरी मिली, लेकिन वनाधिकार और राजस्व संबंधी प्रक्रिया बाकी है। ग्रामीण स्पष्ट जानकारी, नियमित बैठकों तथा शीघ्र, पारदर्शी और न्यायपूर्ण पुनर्वास चाहते हैं।
रामगढ़ विषधारी बाघ संरक्षित क्षेत्र के आठ गांवों का पुनर्वास अधूरा
रामगढ़ विषधारी बाघ संरक्षित क्षेत्र के आठ गांवों के लगभग 3,000 निवासी अधिसूचना के करीब चार वर्ष बाद भी पुनर्वास की प्रतीक्षा में हैं। भूमि, बजट, कर्मचारियों और स्पष्ट जानकारी की कमी से प्रक्रिया धीमी है, जबकि बाघों की बढ़ती आवाजाही से सुरक्षा की चिंता बढ़ी है।
मुख्य तथ्य
- संकटग्रस्त मुख्य क्षेत्र के आठ राजस्व गांवों के लगभग 3,000 लोग पुनर्वास की प्रतीक्षा में हैं।
- इसे मई 2022 में देश का 52वां और राजस्थान का चौथा बाघ संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था।
- इसका कुल क्षेत्रफल 1,501.89 वर्ग किलोमीटर है और मुख्य क्षेत्र 481.90 वर्ग किलोमीटर से अधिक है।
- गुलखेड़ी के 215 चिन्हित परिवारों में से 213 ने मुआवजा पैकेज चुन लिया है और 88 मकान गिराए जा चुके हैं।
- भेरूपुरा के 264 परिवारों में से करीब 150 को ₹3 लाख की पहली किस्त मिल चुकी है।
- उपयुक्त भूमि, बजट राशि और समर्पित कर्मचारियों की कमी से पुनर्वास धीमा है।
6-अक्ष वर्गीकरण
अभ्यास प्रश्न MCQ
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रामगढ़ विषधारी बाघ संरक्षित क्षेत्र में गांवों के पुनर्वास के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गुलखेड़ी के सभी 215 चिन्हित परिवारों ने मुआवजा पैकेज चुन लिया है। 2. भेरूपुरा के 264 परिवारों में से करीब 150 को ₹3 लाख की पहली किस्त मिल चुकी है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा सही है?
कथन 1 गलत है, क्योंकि गुलखेड़ी के 215 चिन्हित परिवारों में से 213 ने पैकेज चुना है और दो परिवारों ने अभी निर्णय नहीं लिया। कथन 2 सही है। भेरूपुरा के 264 परिवारों में से करीब 150 को ₹3 लाख की पहली किस्त मिली है, जबकि दूसरी किस्त राज्य के बजट से राशि मिलने पर दी जाएगी।
स्रोत: अमर उजाला
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कितने गांवों और निवासियों का पुनर्वास बाकी है?
आठ राजस्व गांवों के लगभग 3,000 निवासियों का पुनर्वास बाकी है।
गुलखेड़ी में कितनी प्रगति हुई है?
करीब 70 प्रतिशत परिवार घर खाली कर चुके हैं, 88 मकान गिराए जा चुके हैं और 215 में से 213 चिन्हित परिवार मुआवजा पैकेज चुन चुके हैं।
मुआवजे के कौन-कौन से विकल्प हैं?
₹15 लाख का नकद विकल्प, कृषि भूमि और नकद सहायता वाला भूमि विकल्प तथा गैर-निवासी भू-स्वामियों के लिए जिला स्तरीय समिति की दरों से जुड़ा विकल्प उपलब्ध है।
पुनर्वास की प्रक्रिया धीमी क्यों है?
उपयुक्त भूमि की कमी, बजट राशि में देरी और समर्पित कर्मचारियों की कमी इसके प्रमुख कारण हैं।
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