23 अगस्त 2026 को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने बताया कि भारत में फैल रहे इन्फ्लुएंजा ए (H1N1) विषाणु A/Missouri/11/2025 (H1N1) pdm09-जैसे प्रकार के हैं। ये 6B.1A.5a2a वंश समूह और D.3.1.1 उपवंश में आते हैं तथा 2025 से फैल रहे हैं। परिषद ने स्पष्ट किया कि H1N1 का कोई नया प्रकार नहीं मिला है, इसलिए घबराने की वजह नहीं है। अभी फैल रहे इन्फ्लुएंजा विषाणुओं का उत्तरी गोलार्ध के लिए सुझाए गए टीका-प्रकारों से अच्छा मेल है। भारत के 2025–26 सत्र के लिए सुझाए गए त्रिसंयोजी टीके में H1N1, H3N2 और B/Victoria घटक शामिल थे। H1N1 सहित मौसमी इन्फ्लुएंजा प्रायः अपने आप ठीक हो जाता है। इसके सामान्य लक्षण बुखार, खांसी, सिरदर्द और बदन दर्द हैं। उचित देखभाल और आराम से अधिकतर लोग स्वस्थ हो जाते हैं। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमारी वाले लोगों में जटिलताओं का खतरा अधिक है। लक्षण बने रहें, बढ़ें या गंभीर हो जाएं तो चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। इसके बावजूद मानसून में मौसमी H1N1 के मामले बढ़े हैं, खासकर बड़े शहरों में। दिल्ली में वर्ष के दौरान 1,777 पुष्ट मामले सामने आए, जिनमें 20 अगस्त के 114 नए मामले शामिल हैं। कर्नाटक में 4,000 से अधिक मामले दर्ज हुए और इनमें आधे से अधिक बेंगलुरु में थे। मुंबई, चेन्नई और केरल के कुछ हिस्सों में भी इन्फ्लुएंजा गतिविधि बढ़ी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय नियमित रूप से स्थिति पर नजर रख रहा है और आवश्यक जन-स्वास्थ्य उपाय कर रहा है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र देशव्यापी इन्फ्लुएंजा निगरानी तंत्र चलाता है, राज्यवार आंकड़े तथा उपचार और बचाव संबंधी दिशा-निर्देश प्रकाशित करता है और विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रकार-संबंधी सिफारिशों के आधार पर मौसमी टीकाकरण सुझाता है।