इस्पात मंत्रालय के अनुसार अप्रैल–अगस्त 2026 में भारत का इस्पात क्षेत्र सकारात्मक वृद्धि की राह पर बना रहा। प्रेस सूचना ब्यूरो दिल्ली की 3 सितंबर 2026 की विज्ञप्ति अनंतिम संयुक्त संयंत्र समिति के अगस्त 2026 आंकड़ों पर आधारित है।
अप्रैल–अगस्त 2026 में कच्चा इस्पात उत्पादन 7.03 करोड़ टन रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 6.90 करोड़ टन से 1.8% अधिक है। हॉट मेटल 1.9% बढ़कर 4.00 करोड़ टन और तैयार इस्पात उत्पादन 3.8% बढ़कर 6.81 करोड़ टन रहा। अगस्त 2026 में कच्चा इस्पात 1.41 करोड़ टन (−0.1%) और तैयार इस्पात 1.35 करोड़ टन (+0.3%) रहा।
मांग मज़बूत रही: अप्रैल–अगस्त 2026 में तैयार इस्पात खपत 7.03 करोड़ टन हुई, जो पिछले वर्ष के 6.57 करोड़ टन से 7.0% अधिक है। अगस्त में खपत 1.43 करोड़ टन रही, यानी 3.9% की वृद्धि।
व्यापार में अप्रैल–अगस्त 2026 में तैयार इस्पात आयात 3487.3 हजार टन (+29.5%) और निर्यात 2986.0 हजार टन (+34.1%) रहा। मात्रा के हिसाब से भारत इस अवधि में तैयार इस्पात का शुद्ध आयातक रहा। आयात मूल्य ₹36193.9 करोड़ और निर्यात मूल्य ₹23646.6 करोड़ रहा।
अप्रैल–अगस्त 2026 में शीर्ष सात उत्पादकों का कच्चा इस्पात उत्पादन 3.92 करोड़ टन रहा। सार्वजनिक क्षेत्र की हिस्सेदारी कच्चे इस्पात में 15.8% और हॉट मेटल में 30.0% थी। एनएमडीसी ने अगस्त 2026 में 40.7 लाख टन लौह अयस्क उत्पादन (+20.8%) और 35.8 लाख टन बिक्री (+5.6%) दर्ज की। नगरनार पेलेट संयंत्र (20 लाख टन प्रति वर्ष क्षमता) में इंड्यूरेटिंग मशीन सफलतापूर्वक चालू हुई। एसआरटीएमआई और स्वीडन के स्वेरिम ने लौह एवं इस्पात अनुसंधान पर समझौता ज्ञापन किया, जिसमें हरित इस्पात और कार्बन घटाना शामिल है। सेल के भिलाई इस्पात संयंत्र ने भिलाई और चंद्रपुर फेरो एलॉय संयंत्र के लिए कार्बन डाइऑक्साइड डैशबोर्ड शुरू किया, जिससे दैनिक उत्सर्जन निगरानी संभव होगी।
