केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने H1N1 इन्फ्लुएंजा से निपटने की देश की तैयारियों की समीक्षा की। इसमें दिल्ली पर विशेष ध्यान दिया गया, जहाँ इस वर्ष संक्रमण तेजी से बढ़ा है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के निगरानी आँकड़ों के अनुसार, दिल्ली में अगस्त के मध्य तक H1N1 के 1,449 मामले दर्ज हुए, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में 229 मामले थे। केंद्र और एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के आँकड़ों में कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और गुजरात में भी मौसमी इन्फ्लुएंजा की उल्लेखनीय सक्रियता दिखाई गई।
समीक्षा में देश की महामारी-विज्ञान संबंधी स्थिति, प्रयोगशाला निगरानी तंत्र तथा इन्फ्लुएंजा जैसे रोग और गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण के रुझानों का आकलन किया गया। नड्डा ने राज्यों की स्वास्थ्य व्यवस्था में अधिक सतर्कता, सुदृढ़ निगरानी और पर्याप्त तैयारी पर बल दिया, ताकि श्वसन रोग के समूहों या असामान्य बढ़ोतरी की पहचान कर उनका प्रबंधन किया जा सके। यह समीक्षा केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव के 10 जुलाई के उस निर्देश के बाद हुई, जिसमें राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से तीव्र श्वसन रोगों के लिए तैयारी मजबूत करने को कहा गया था।
H1N1 इन्फ्लुएंजा, जिसे सामान्यतः स्वाइन फ्लू कहा जाता है, एक संक्रामक श्वसन रोग है। संक्रमित व्यक्ति के खाँसने, छींकने या बोलने पर यह फैल सकता है। इससे निमोनिया और साँस लेने में गंभीर परेशानी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा दीर्घकालिक रोग या कमजोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को अधिक खतरा है। गंभीर संक्रमण के संदिग्ध मामलों की शीघ्र जाँच और अस्पतालों की तैयारी को समय रहते बढ़ोतरी पहचानने तथा अनावश्यक जटिलताओं से बचने के लिए जरूरी बताया गया। तेज बुखार, साँस लेने में कठिनाई, बढ़ती खाँसी या असामान्य थकान की अनदेखी और अपने-आप दवा लेने से बचना चाहिए।
नड्डा ने डेंगू और मलेरिया जैसी मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए समन्वित रोग प्रबंधन पर भी जोर दिया। दिल्ली में सामुदायिक भागीदारी से तपेदिक की पहचान में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने जनप्रतिनिधियों और नगर निकायों से जन-जागरूकता का नेतृत्व करने को कहा। समीक्षा में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
