सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क योजना भारत से सॉफ्टवेयर और सूचना प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने वाली शत-प्रतिशत निर्यात-उन्मुख योजना है। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया इस योजना के तहत एकल-खिड़की मंज़ूरी प्रणाली से वैधानिक सेवाएँ देता है। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार 2025-26 में 2,125 इकाइयाँ थीं, जबकि 2024-25 में 2,042 और 2023-24 में 2,059 इकाइयाँ थीं। वर्ष 2025-26 में इन इकाइयों का अनुमानित निवेश ₹7,362.86 करोड़, अनुमानित आयात ₹9,960.26 करोड़ और अनुमानित निर्यात ₹7,73,898.97 करोड़ रहा। निर्यात 2024-25 में ₹6,88,194.11 करोड़ और 2023-24 में ₹6,36,619.87 करोड़ था। मंज़ूरी की प्रक्रिया आसान बनाने और कारोबार में सहूलियत बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। सॉफ्टेक्स दाखिल करने, उसे मंज़ूरी देने और अंतिम सूचना भेजने जैसी वैधानिक सेवाएँ स्वचालित कर दी गई हैं। सूचना प्रौद्योगिकी निर्यातकों के लिए ऑनलाइन प्रणाली को भारतीय रिज़र्व बैंक की निर्यात डेटा प्रसंस्करण और निगरानी प्रणाली से जोड़ा गया है। इससे निर्यात घोषणा के आँकड़े लगभग उसी समय इलेक्ट्रॉनिक रूप से बैंक तक पहुँचते हैं। इससे आँकड़ों का तेज़ आदान-प्रदान, अधिक सटीकता और पारदर्शिता, मानवीय दखल में कमी, बेहतर निगरानी तथा नियमों के पालन में आसानी होती है। हर मामले के लिए अलग आयात अनुमति लेने के बजाय संबंधित वित्त वर्ष के लिए एकमुश्त अनुमति की व्यवस्था की गई है। घरेलू टैरिफ क्षेत्र में बिक्री के लिए पहले ली जाने वाली अनुमति की जगह स्व-घोषणा लागू की गई है; हालांकि संचालन के पहले वर्ष में अग्रिम बिक्री इसका अपवाद है। योजना के तहत मंज़ूरी और सेवाओं के लिए नागरिक चार्टर में तय समय-सीमा का पालन किया जाता है। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 12 अगस्त 2026 को लोकसभा में दी।