पांच गोताखोरी सहायक जहाजों की परियोजना के तहत बन रहे पांचवें पोत डीएससी ए-24 (यार्ड 329) का 1 अगस्त 2026 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित टीटागढ़ में जलावतरण हुआ। श्रीमती कमल सिंह ने कार्मिक प्रमुख वाइस एडमिरल गुरचरण सिंह की उपस्थिति में जहाज को औपचारिक रूप से समुद्र में उतारा। समारोह में भारतीय नौसेना और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अन्य गणमान्य अतिथि भी शामिल हुए। इस गोताखोरी सहायक जहाज का निर्माण मेसर्स टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड, कोलकाता कर रही है। परियोजना के पोतों की विस्थापन क्षमता लगभग 300 से 400 टन है और उनकी बनावट द्वि-पतवार वाली है। इससे समुद्र में बेहतर स्थिरता, अधिक डेक क्षेत्र और कठिन समुद्री परिस्थितियों में भी अच्छी संचालन क्षमता मिलती है। यही विशेषताएँ इन्हें गोताखोरी अभियानों के लिए उपयुक्त बनाती हैं। इन पोतों का अभिकल्पन और निर्माण इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग द्वारा तय नौसैनिक मानकों तथा विनियमों के अनुसार किया गया है। इससे सुरक्षा, विश्वसनीयता और संचालन क्षमता सुनिश्चित होती है। भारतीय नौसेना में शामिल होने के बाद ये जहाज गोताखोरी सहायता, पानी के भीतर जाँच, बचाव कार्य में सहायता और तटीय क्षेत्रों में तैनाती की क्षमता बढ़ाएँगे। इनमें लगे लगभग 70 प्रतिशत मुख्य और सहायक उपकरण घरेलू निर्माताओं से लिए गए हैं। इसलिए यह परियोजना भारत सरकार और रक्षा मंत्रालय की ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘मेक इन इंडिया’ पहलों का प्रतीक है। यह जलावतरण विशेष नौसैनिक सहायता, घरेलू उपकरणों के उपयोग और तय मानकों के अनुसार जहाज निर्माण—तीनों को सामने लाता है।
भारतीय नौसेना का पांचवां गोताखोरी सहायक जहाज डीएससी ए-24 कोलकाता में जलावतारित
पांच पोतों वाली गोताखोरी सहायक जहाज परियोजना के पांचवें जहाज डीएससी ए-24 का 1 अगस्त 2026 को कोलकाता के टीटागढ़ में जलावतरण हुआ। द्वि-पतवार बनावट, विशेष समुद्री भूमिकाएँ और लगभग 70 प्रतिशत घरेलू उपकरण इसे नौसेना की क्षमता बढ़ाने के साथ स्वदेशी निर्माण की पहलों से जोड़ते हैं।
मुख्य तथ्य
- डीएससी ए-24 पांच गोताखोरी सहायक जहाजों की परियोजना का पांचवां पोत है।
- इसका जलावतरण 1 अगस्त 2026 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित टीटागढ़ में हुआ।
- इन पोतों की विस्थापन क्षमता लगभग 300 से 400 टन है और इनकी बनावट द्वि-पतवार वाली है।
- इनका अभिकल्पन और निर्माण इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग के नौसैनिक मानकों तथा विनियमों के अनुसार हुआ है।
- इनमें लगे लगभग 70 प्रतिशत मुख्य और सहायक उपकरण घरेलू निर्माताओं से लिए गए हैं।
- ये पोत गोताखोरी सहायता, पानी के भीतर जाँच, बचाव कार्य में सहायता और तटीय तैनाती की क्षमता बढ़ाएँगे।
6-अक्ष वर्गीकरण
अभ्यास प्रश्न MCQ
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गोताखोरी सहायक जहाज परियोजना के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. डीएससी ए-24 पांच पोतों वाली परियोजना का पांचवां जहाज है। 2. इन पोतों की विस्थापन क्षमता लगभग 300 से 400 टन है और इनकी बनावट द्वि-पतवार वाली है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
दोनों कथन सही हैं। डीएससी ए-24 पांच गोताखोरी सहायक जहाजों की परियोजना का पांचवां पोत है। परियोजना के पोतों की विस्थापन क्षमता लगभग 300 से 400 टन है और इनकी बनावट द्वि-पतवार वाली है। इससे समुद्र में बेहतर स्थिरता, अधिक डेक क्षेत्र और कठिन समुद्री परिस्थितियों में अच्छी संचालन क्षमता मिलती है।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
डीएससी ए-24 क्या है?
यह पांच गोताखोरी सहायक जहाजों की परियोजना के तहत बन रहा पांचवां पोत है।
डीएससी ए-24 का जलावतरण कब और कहाँ हुआ?
इसका जलावतरण 1 अगस्त 2026 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित टीटागढ़ में हुआ।
गोताखोरी सहायक जहाज का निर्माण कौन कर रहा है?
इसका निर्माण मेसर्स टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड, कोलकाता कर रही है।
ये पोत किन कार्यों में सहायता करेंगे?
ये गोताखोरी अभियानों, पानी के भीतर जाँच, बचाव कार्य और तटीय क्षेत्रों में तैनाती में सहायता करेंगे।
मुख्य और सहायक उपकरणों में घरेलू हिस्सेदारी कितनी है?
लगभग 70 प्रतिशत उपकरण घरेलू निर्माताओं से लिए गए हैं।
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